देहरादून। Shri Guru Ram Rai University के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत भूगोल विभाग द्वारा “सतत विकास लक्ष्य: चुनौतियाँ एवं प्रगति” विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन पथरीबाग परिसर स्थित सभागार में हाइब्रिड मोड में किया गया। सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भाग लेकर सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सामाजिक-आर्थिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।
अकादमिक संवाद और नवाचार को मिला बढ़ावा
विश्वविद्यालय के माननीय प्रेसिडेंट श्रीमहंत देवेंद्र दास जी महाराज ने सम्मेलन के सफल आयोजन पर शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ।
कुलपति प्रो. (डॉ.) के. प्रतापन ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयासरत है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच अकादमिक संवाद, शोध सहयोग और नवाचार को नई दिशा देते हैं।
मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय की डीन प्रो. (डॉ.) प्रीति तिवारी ने सतत विकास को मानव समाज के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया। वहीं डीन छात्र कल्याण प्रो. (डॉ.) मालविका कांडपाल ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों और शोधार्थियों में पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं। सम्मेलन की संयोजक डॉ. सुरेंद्र कौर रावल ने सम्मेलन की पृष्ठभूमि और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथियों के विचार
मुख्य अतिथि पद्मश्री सम्मानित पर्यावरणविद् प्रेम चन्द्र शर्मा ने रसायन-मुक्त खेती और जैविक कृषि को पर्यावरण संरक्षण एवं स्वस्थ समाज की आधारशिला बताया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. (डॉ.) मोहन सिंह पंवार, विभागाध्यक्ष, भूगोल विभाग, Hemvati Nandan Bahuguna Garhwal University ने हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन, घटती कृषि योग्य भूमि और जैव-विविधता संरक्षण की चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की सहभागिता
सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। University of Kelaniya की डॉ. के. एल. वात्सला गुणवर्धने ने सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु वैश्विक सहयोग, सशक्त नीतियों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।
Thammasat University के डॉ. मोहम्मद फहीम ने सतत विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और नवाचार को अनिवार्य बताया।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डॉ. महविश अंजुम ने कार्यस्थलों पर एर्गोनॉमिक समस्याओं और एआई आधारित समाधानों पर प्रकाश डाला, जबकि Hemvati Nandan Bahuguna Garhwal University के डॉ. हसीबुर रहमान ने जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विचार साझा किए।
सम्मेलन के दूसरे सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. (डॉ.) विजय कांत पुरोहित ने हिमालयी जैव-विविधता और औषधीय पौधों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
शोध-पत्रों में उभरे समाधान
तकनीकी सत्रों में देश-विदेश के शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण, नीति-निर्माण और सामाजिक सहभागिता जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई।
कार्यक्रम के अंत में संयोजक डॉ. सुरेंद्र कौर रावल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। सम्मेलन के सफल आयोजन में सह-संयोजक प्रो. गीता रावत, डॉ. शिल्पी जैन एवं सचिव डॉ. सुनील किश्तवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।











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