देहरादून। उत्तराखण्ड के समृद्ध जैव-विविधता और औषधीय वनस्पतियों की वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक संभावनाओं पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल समापन हुआ। यह सम्मेलन उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकोस्ट) के सहयोग से सीआईएमएस कॉलेज के सूक्ष्मजीव विज्ञान (माइक्रोबायोलॉजी) विभाग द्वारा “उत्तराखण्ड के औषधीय पौधे, प्राकृतिक उत्पाद एवं उनका औषधि उद्योग में योगदान” विषय पर आयोजित किया गया।
सम्मेलन में औषधीय पौधों की उपयोगिता, संरक्षण, अनुसंधान, औद्योगिक उपयोग तथा स्टार्टअप एवं उद्यमिता की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में 500 से अधिक छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता रही।
शोध और नवाचार से जुड़ने का माध्यम: एडवोकेट ललित मोहन जोशी
समापन सत्र को संबोधित करते हुए सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के चेयरमैन एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय सम्मेलन विद्यार्थियों को शोध, नवाचार और व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने यूकोस्ट का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्थान भविष्य में भी ऐसे अकादमिक आयोजनों को प्रोत्साहित करता रहेगा, जिससे विद्यार्थियों को नई दिशा और बेहतर अवसर मिल सकें।
पर्वतीय औषधीय पौधों के गुणों पर विस्तृत चर्चा
सम्मेलन के प्रथम दिन मुख्य वक्ता के रूप में कॉलेज ऑफ अप्लाइड साइंस, रास बिहारी बोस सुभारती यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. संदीप ध्यानी ने उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले प्रमुख औषधीय पौधों—तिमूर, किल्मोड़ा, हिसालू, हरड़, बेड़ू और तिमला—के औषधीय गुणों की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इन पौधों में प्राकृतिक औषधीय तत्व प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग दवाइयों, स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों और अन्य उपयोगी वस्तुओं के निर्माण में किया जा सकता है। डॉ. ध्यानी ने भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे पूर्वज जड़ी-बूटियों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग से स्वस्थ जीवन जीते थे। यदि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ा जाए तो यह स्वास्थ्य क्षेत्र और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को मैदानी अध्ययन (फील्ड स्टडी) के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि पौधों की पहचान और उनके औषधीय गुणों की व्यावहारिक समझ भी अत्यंत आवश्यक है।
दैनिक जीवन में औषधीय पौधों का महत्व
सम्मेलन के दूसरे दिन मुख्य वक्ता के रूप में श्री गुरु राम राय यूनिवर्सिटी, देहरादून के उद्यान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कमला ध्यानी उपस्थित रहीं। उन्होंने उत्तराखण्ड में पाए जाने वाले विभिन्न औषधीय पौधों के दैनिक जीवन में उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अदरक और तुलसी का नियमित उपयोग हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है, उसी प्रकार अन्य स्थानीय औषधीय पौधों के गुणों की जानकारी भी समाज को होनी चाहिए। ये पौधे केवल रोग होने पर औषधि के रूप में ही नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने के लिए दैनिक आहार और दिनचर्या का हिस्सा भी बन सकते हैं।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के प्रबंध निदेशक संजय जोशी, प्रशासनिक अधिकारी केदार सिंह, सीआईएमएस कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल की उप-प्रधानाचार्य डॉ. प्रेरणा बडोनी, डॉ. अंजलि उनियाल, डॉ. मेघा पंत, डॉ. अदिति पांडे, पंकज सजवाण, चन्द्रशेखर, खुशी सब्बरवाल, शिवांगी अग्रवाल, आस्था वशिष्ठ सहित अन्य शिक्षकगण एवं 500 से अधिक विद्यार्थी उपस्थित रहे।











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