देहरादून। श्री गुरु राम राय (एसजीआरआर) विश्वविद्यालय में अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ, स्कूल ऑफ बेसिक एंड एप्लाइड साइंस द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘बायोटेक फ्रंटियर्स 2025’ का विधिवत शुभारंभ हुआ। 21-22 मार्च को आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य विषय “इमर्जिंग ट्रेंड्स इन बायोटेक्नोलॉजी एंड माइक्रोबायोम रिसर्च” रहा।
सम्मेलन में देशभर के 8 राज्यों के 250 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जबकि 94 शोध पत्र और 95 पोस्टर प्रस्तुत किए गए। इस दौरान जैव प्रौद्योगिकी, सूक्ष्म जीवविज्ञान, नैनो टेक्नोलॉजी, कैंसर बायोलॉजी, औषधीय विज्ञान और स्वास्थ्य देखभाल में प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा हुई।
सम्मेलन का भव्य उद्घाटन और शोध पुस्तिका का विमोचन
सम्मेलन का उद्घाटन विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. कुमुद सकलानी, प्रेसिडेंट सलाहकार डॉ. जेपी पचौरी, रजिस्ट्रार डॉ. लोकेश गंभीर, मुख्य अतिथि डॉ. गौरव शर्मा (जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, देहरादून) और विशिष्ट अतिथि डॉ. नृपेन्द्र चौहान (डायरेक्टर, सेंटर फॉर अरोमैटिक प्लांट्स, उत्तराखंड) द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
उद्घाटन सत्र का मुख्य आकर्षण “शोध संदर्भ पुस्तिका” का विमोचन रहा। कुलपति प्रो. डॉ. कुमुद सकलानी ने कहा कि यह सम्मेलन वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को संवाद और नवाचार का मंच प्रदान करेगा, जिससे नए शोध और व्यावहारिक अनुप्रयोगों को बल मिलेगा।
तकनीकी सत्र और प्रमुख व्याख्यान
सम्मेलन में विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। पहले सत्र में “स्टेम सेल रिसर्च और कैंसर बायोलॉजी: स्वास्थ्य देखभाल के लिए प्राकृतिक संसाधन” विषय पर चर्चा हुई।
- प्रो. डॉ. पंकज गर्ग (कैंसर सर्जरी विभाग, एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज) ने कैंसर उपचार में स्टेम सेल रिसर्च के नवीनतम आयामों पर व्याख्यान दिया।
- डॉ. प्रमोद कुमार (वैज्ञानिक-एफ, आरएमसी, टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, बीएआरसी इंडिया) ने ट्यूबरक्लोसिस पर अपने शोध और इसके प्रभावों का विश्लेषण प्रस्तुत किया।
दूसरे सत्र में “ड्रग डिस्कवरी और थेरेप्यूटिक्स” विषय पर गहन चर्चा हुई।
- डॉ. राजेश कालरा (आईआईटी रुड़की) ने नई दवा खोज तकनीकों पर व्याख्यान दिया।
- प्रो. हेनरिक डी. एम. कौटिन्हो (यूनिवर्सिटी ऑफ कारिरी, ब्राजील) ने फार्मास्युटिकल बायोटेक्नोलॉजी में वैश्विक शोध पर अपने विचार साझा किए।
- डॉ. देवरथ त्रिपाठी (बीएआरसी, मुंबई) ने रेडियो फार्मास्युटिकल्स और कैंसर थेरेपी में आधुनिक तकनीक के महत्व को रेखांकित किया।
पोस्टर और शोध पत्र प्रस्तुतिकरण
सम्मेलन में शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने अपने नवीनतम शोध पत्र प्रस्तुत किए। ऑफलाइन सत्र की अध्यक्षता प्रो. डॉ. मनीष कुमार मिश्रा ने की, जबकि ऑनलाइन सत्र का संचालन डॉ. श्वेता साहनी और डॉ. मंजूषा त्यागी ने किया।
सम्मेलन का समापन और भविष्य की संभावनाएं
सम्मेलन के समापन सत्र में शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों के बीच गहन विचार-विमर्श हुआ। सभी ने जैव प्रौद्योगिकी और सूक्ष्म जीवविज्ञान में हो रहे नवीनतम विकास को भविष्य के चिकित्सा विज्ञान के लिए क्रांतिकारी बताया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. लोकेश गंभीर ने कहा कि ऐसे सम्मेलन युवा शोधकर्ताओं को वैज्ञानिक नवाचारों को समझने और अपने शोध को बेहतर बनाने का अवसर प्रदान करते हैं। आयोजन सचिव डॉ. गिरीश चंद्र ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सभी प्रतिभागियों, अतिथियों और आयोजकों का आभार जताया।