प्रदेश की वित्तीय स्थिति में सुधार: राजस्व में 10% और खर्च में 6% की वृद्धि
प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 94,247 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया था। वित्त विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च तक सरकार ने कुल बजट का 70% खर्च कर दिया, जो वेज एंड मीन्स एडवांस जोड़ने के बाद 80% से अधिक पहुंच जाता है।
राजस्व और पूंजीगत खर्च का विश्लेषण
-
राजस्व खर्च: 50,500 करोड़ रुपये
-
पूंजीगत खर्च: 11,000 करोड़ रुपये
-
ऋण पुनर्भुगतान: 4,360 करोड़ रुपये
-
कुल खर्च: लगभग 70,000 करोड़ रुपये
आय में 10% की वृद्धि
वित्त सचिव दिलीप जावलकर के अनुसार, प्रदेश सरकार ने इस वर्ष राजस्व में 10% की वृद्धि दर्ज की है। 31 मार्च तक अनुमानित कुल आय 66,000 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले वर्ष यह 59,935 करोड़ रुपये थी।
अवसंरचना पर 11,000 करोड़ रुपये का निवेश
लगातार दूसरे वर्ष सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये से अधिक पूंजीगत खर्च किया। इस राशि से विभिन्न विभागों ने अवस्थापना विकास में योगदान दिया:
-
वित्त विभाग: 1,432 करोड़ रुपये
-
लोक निर्माण विभाग: 1,408 करोड़ रुपये
-
ग्रामीण विकास: 1,382 करोड़ रुपये
-
सिंचाई विभाग: 924 करोड़ रुपये
-
शहरी विकास: 763 करोड़ रुपये
-
ऊर्जा विभाग: 756 करोड़ रुपये
स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन पर खर्च
कुछ विभागों का पूंजीगत खर्च 100 करोड़ रुपये से कम रहा, जैसे:
-
समाज कल्याण: 97 करोड़ रुपये
-
खेल विभाग: 97 करोड़ रुपये
-
चिकित्सा शिक्षा: 94 करोड़ रुपये
-
तकनीकी शिक्षा: 86 करोड़ रुपये
-
उच्च शिक्षा: 79 करोड़ रुपये
स्वयं के संसाधनों से 20,680 करोड़ की आय
प्रदेश सरकार ने अपने संसाधनों से राजस्व में 7% की वृद्धि की, जिसमें प्रमुख योगदान रहा:
-
राज्य कर (SGST): 9,256 करोड़ रुपये (11.5% वृद्धि)
-
स्टाम्प एवं पंजीकरण शुल्क: 2,635 करोड़ रुपये (8% वृद्धि)
-
आबकारी कर: 4,310 करोड़ रुपये
-
खनन से आय: 1,035 करोड़ रुपये (60% वृद्धि)
-
वन विभाग से आय: 574 करोड़ रुपये
केंद्रीय करों में भी राज्य का हिस्सा 14% बढ़कर 14,386 करोड़ रुपये हो गया।
निष्कर्ष
प्रदेश सरकार की वित्तीय स्थिति लगातार सुधार की ओर है। राजस्व में वृद्धि और पूंजीगत व्यय में निरंतरता से प्रदेश के आर्थिक विकास को गति मिली है। आने वाले समय में सरकार का ध्यान अवस्थापना विकास, सामाजिक कल्याण और शिक्षा पर रहेगा।