15 अफसरों की टीम ने मारा छापा
आयुक्त राज्य कर सोनिका के निर्देश पर विभाग की सीआईयू टीम ने फर्म की जीएसटी रिटर्न की जांच की। आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया कि एक ही जगह से दो प्रतिष्ठान संचालित हो रहे थे और दोनों के निदेशक समान थे।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आभूषण ग्राहकों को तो बेचे जा रहे थे, लेकिन दस्तावेजों में उसकी आपूर्ति एक दूसरी फर्म को दर्शाई जा रही थी। इस तरह फर्जी इनवॉइस बनाकर आईटीसी (Input Tax Credit) का लाभ लिया जा रहा था और वास्तविक बिक्री को छुपाया जा रहा था।
मौके पर ही जमा कराए 45 लाख रुपये
गड़बड़ी सामने आने पर राज्य कर विभाग की 15 अफसरों की टीम ने प्रतिष्ठान की भौतिक जांच की। बड़ी मात्रा में आय-व्यय के दस्तावेज जब्त किए गए और डिजिटल उपकरणों को भी फोरेंसिक टीम की मदद से कब्जे में लिया गया।
जांच में कर चोरी के ठोस सबूत मिलने पर संचालकों ने मौके पर ही 45 लाख रुपये जमा कर दिए। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पूरी जांच के बाद टैक्स चोरी की राशि और अधिक बढ़ सकती है।
कैश बिक्री के असली आंकड़े आएंगे सामने
अधिकारियों के अनुसार फर्म में बड़े पैमाने पर आभूषणों की कैश बिक्री की जा रही थी, जिसे घोषित नहीं किया गया था। कब्जे में लिए गए दस्तावेजों का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है।
जांच पूरी होने के बाद यह साफ होगा कि कुल कितनी कर चोरी की गई है। इसके आधार पर विभाग कर वसूली के साथ-साथ ब्याज और अर्थदंड भी लगाएगा।
Discussion about this post