देहरादून। उत्तराखंड में प्रस्तावित बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर आम उपभोक्ताओं से लेकर उद्योग जगत तक में नाराजगी देखने को मिल रही है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग की जनसुनवाई में इस बार रिकॉर्ड भीड़ उमड़ी और बड़ी संख्या में लोगों ने दरों में प्रस्तावित इजाफे पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
जनसुनवाई के दौरान उपभोक्ताओं ने सवाल उठाया कि जब पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में कई वर्षों से बिजली दरों में वृद्धि नहीं हुई है, तो उत्तराखंड में लगभग हर साल बढ़ोतरी क्यों की जाती है। इस मुद्दे पर आयोग के सामने आम उपभोक्ता, उद्योग प्रतिनिधि और पूर्व अधिकारी खुलकर बोले।
आयोग की जनसुनवाई में तीखी बहस
शुक्रवार को आयोजित सुनवाई में आयोग अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी और सदस्य (विधि) अनुराग शर्मा मौजूद रहे। प्रस्तावित नई दरों पर चर्चा के दौरान यशवीर आर्य, उम्मेद सिंह, रमेश जोशी और प्रदीप सती सहित कई प्रतिनिधियों ने दर वृद्धि का विरोध किया।
पूर्व अधिकारी एसएम बिजल्वाण ने कहा कि लाइन लॉस कम करने और सरकारी विभागों से बकाया वसूली करने के बजाय आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। वहीं यूकेडी प्रतिनिधि मीनाक्षी घिल्डियाल ने स्मार्ट मीटर के जरिए स्वत: लोड बढ़ाने की प्रक्रिया को अनुचित बताते हुए इसे रोकने की मांग की।
यूपीसीएल का पक्ष: यूपी में मिलती है सब्सिडी
जनसुनवाई में मौजूद उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी दिए जाने के कारण वहां दरों में वृद्धि नहीं की जाती, जबकि उत्तराखंड में ऐसा कोई व्यापक प्रावधान नहीं है। इसी कारण लागत के आधार पर दर संशोधन प्रस्तावित किया जाता है।
उद्योगों ने जताई गहरी चिंता
जनसुनवाई में उद्योग जगत ने भी दर वृद्धि को राज्य की औद्योगिक सेहत के लिए खतरनाक बताया। उद्योग प्रतिनिधि राजीव अग्रवाल ने कहा कि ऊर्जा निगमों की नीतियां उद्योगों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बना रही हैं।
इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि एलटी टैरिफ के मामले में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से महंगा पड़ रहा है, जिससे निवेश प्रभावित हो रहा है। उनका कहना था कि सरकारी उपक्रमों से बकाया वसूली नहीं हो रही, लेकिन उद्योगों पर दरों का बोझ बढ़ाया जा रहा है।
उद्योग प्रतिनिधि पवन अग्रवाल ने सुझाव दिया कि टैरिफ को उत्तर प्रदेश से डेढ़ से दो रुपये प्रति यूनिट सस्ता किया जाए, तभी नए उद्योग राज्य में आएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि 30 पैसे सेस, 10 पैसे रॉयल्टी और 60 पैसे वाटर टैक्स के रूप में जो वसूली हो रही है, उसी से दरों का समायोजन किया जाए।
डॉ. हरेंद्र गर्ग ने दावा किया कि राज्य के लगभग 76 प्रतिशत उद्योग थर्ड पार्टी जनरेटर मॉडल पर काम कर रहे हैं और बीते दो दशकों में उनकी आय में खास बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि बिजली की लागत लगातार बढ़ी है। उन्होंने चेतावनी दी कि दर वृद्धि लागू होने पर आठ लाख से अधिक कर्मचारियों के रोजगार पर असर पड़ सकता है।
स्मार्ट मीटर को लेकर भी उठे सवाल
जनसुनवाई में स्मार्ट मीटर को लेकर भी उपभोक्ताओं ने शिकायतें दर्ज कराईं। कई लोगों का कहना था कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से बिजली बिल लगभग दोगुना हो गया है।
इस पर यूपीसीएल अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी उपभोक्ता को मीटर में गड़बड़ी का संदेह है तो वह शिकायत दर्ज कराए, विभाग चेक मीटर लगाकर जांच करेगा। साथ ही स्मार्ट मीटर प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी आमंत्रित किए गए।
पहली बार इतनी बड़ी संख्या में पहुंचे उपभोक्ता
आयोग की इस जनसुनवाई में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में उपभोक्ता और उद्योग प्रतिनिधि पहुंचे। इससे साफ है कि बिजली दरों का मुद्दा इस समय राज्य में जनचर्चा का बड़ा विषय बन चुका है।
अब देखना होगा कि आयोग उपभोक्ताओं और उद्योगों की आपत्तियों पर कितना विचार करता है और अंतिम दर निर्धारण में क्या फैसला लिया जाता है।












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