‘हर रोज अपमान करता था… इसलिए खत्म कर दिया’
पुलिस पूछताछ में आरोपी ऋषभ ने बताया कि शुभम लगातार उसका मज़ाक उड़ाता और सबके सामने उसका अपमान करता था। धीरे-धीरे यह बात उसके अंदर नफरत और बदले की आग बनकर सुलगने लगी।
“उसने कई बार मुझे सबके सामने नीचा दिखाया… अब वो हमेशा के लिए नीचे चला गया,” — ऋषभ ने पूछताछ में यह चौंकाने वाली बात कही। इसी रंजिश ने इस वारदात को जन्म दिया।
शराब के बहाने बुलाया… और सीवर टैंक में धक्का दे दिया
14 अक्टूबर 2025 की रात ऋषभ ने शुभम को शराब पीने के बहाने शांतिनगर के पुराने सीवर टैंक के पास बुलाया। शक से बचने के लिए उसने दो दोस्तों — अशोक और प्रवीण — को भी बुलाया, ताकि माहौल सामान्य लगे। शराब पीने के बाद जब शुभम पूरी तरह नशे में था और दोनों दोस्त जा चुके थे, तभी ऋषभ ने मौका देखकर शुभम को अचानक टैंक में धक्का दे दिया। शुभम बचने की कोशिश में सरिया में फँस गया, लेकिन ऋषभ ने उसकी टांगें पकड़कर जोर से नीचे धकेल दिया। शुभम की वहीं मौत हो गई और आरोपी मौके से फरार हो गया।
अगली सुबह शव मिलने से मच गई सनसनी
15 अक्टूबर की सुबह शांतिनगर क्षेत्र के लोगों ने पुराने सीवर टैंक में शव देखा तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान शुभम पाल के रूप में हुई। मृतक के पिता रमेश चन्द्र ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या की आशंका जताई। रानीपोखरी थाने में मुकदमा दर्ज हुआ और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देशन में जांच शुरू की गई।
CCTV और मुखबिर नेटवर्क से टूटी गुत्थी
थानाध्यक्ष विकेंद्र चौधरी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने आसपास के CCTV फुटेज खंगाले, लोगों से पूछताछ की और मुखबिर नेटवर्क को सक्रिय किया। तकनीकी साक्ष्य और इनपुट के आधार पर 17 अक्टूबर को आरोपी ऋषभ धीमान को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने वारदात की पूरी कहानी कबूल कर ली। पुलिस ने वारदात के वक्त पहने गए कपड़े और जूते भी बरामद किए हैं।
पुलिस टीम को सराहना
मामले के खुलासे में इन पुलिसकर्मियों की अहम भूमिका रही:
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थानाध्यक्ष विकेंद्र चौधरी
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हे.कां. धीरेंद्र कुमार यादव
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कां. रवि कुमार
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कां. तेज सिंह
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कां. दुष्यन्त
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कां. शशिकांत
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कां. कर्मजीत
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कां. चालक चैनपाल
कानून के शिकंजे में आया ‘अपमान का हत्यारा’
पुलिस ने आरोपी ऋषभ धीमान को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। इस सनसनीखेज हत्या ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि छोटी-छोटी रंजिशें जब मन में सुलगती रहती हैं, तो इंसान का विवेक मर जाता है और नतीजा होता है — मौत और तबाही।
यह मामला समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि अपमान या विवाद का जवाब हिंसा से नहीं, कानून के रास्ते से ही दिया जाना चाहिए। वरना अंजाम सिर्फ बर्बादी होता है।











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