केदारनाथ धाम में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की जा रही है। प्रदेश सरकार ने खच्चरों की लीद और पिरुल (चीड़ की पत्तियों) से बायोमास पेलेट्स बनाने की योजना को कैबिनेट की मंजूरी दे दी है। यह योजना पहली बार पायलट प्रोजेक्ट के रूप में केदारनाथ में लागू होगी।
चारधाम यात्रा के दौरान गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं को ले जाने के लिए आठ हजार से अधिक खच्चर संचालित होते हैं। इन खच्चरों की लीद मार्ग पर जमा हो जाती है, जिससे सफाई और पर्यावरण की समस्या बढ़ जाती है। इस समस्या का समाधान निकालते हुए सरकार ने लीद और पिरुल की पत्तियों से बायोमास पेलेट्स बनाने का निर्णय लिया है।
इन पेलेट्स का इस्तेमाल ईंधन के रूप में किया जाएगा, जैसे पानी गर्म करना और अन्य घरेलू व औद्योगिक जरूरतों में। केदारनाथ धाम के पैदल मार्ग पर हर दो किलोमीटर पर लीद एकत्रित करने के लिए कलेक्शन सेंटर बनाए जाएंगे। इसके अलावा, धाम के पास 1.43 करोड़ रुपये की लागत से बायोमास पेलेट्स प्लांट भी स्थापित किया जाएगा।
पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य में पहले भी गोबर से बायोमास पेलेट्स बनाए जाते थे, लेकिन खच्चरों की लीद और पिरुल से पेलेट्स बनाने का यह पहला प्रयास है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
यह पहल केदारनाथ धाम और चारधाम यात्रा मार्ग को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।










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