देहरादून। सजग इंडिया एवं राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में संचालित नशा उन्मूलन एवं जन-जागरूकता अभियान के तहत शुक्रवार को दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), देहरादून में युवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए उन्हें मानसिक रूप से सशक्त, नैतिक रूप से सजग और समाज व राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी नागरिक बनाना रहा।
नशा सोच और आत्मबल को करता है कमजोर: ललित जोशी
कार्यक्रम में शिक्षाविद एवं राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के सदस्य ललित जोशी ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि नशा व्यक्ति की सोच, पहचान और आत्मबल को कमजोर कर देता है। नशे को किसी भी समस्या का समाधान समझना एक बड़ी भूल है, क्योंकि यह समस्याओं को कम करने के बजाय उन्हें और बढ़ा देता है।
उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए साफ सोच, मजबूत इच्छाशक्ति और सही निर्णय क्षमता अत्यंत आवश्यक है। एक जागरूक, अनुशासित और नशामुक्त युवा ही समाज की वास्तविक शक्ति होता है। यदि युवा पीढ़ी स्वस्थ रहेगी, तभी समाज और देश सुरक्षित एवं सशक्त बन पाएगा।
समाज और राष्ट्र पर भी पड़ता है नशे का दुष्प्रभाव
ललित जोशी ने कहा कि नशे का असर केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव परिवार, समाज और राष्ट्र तक फैलता है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, आत्मनियंत्रण, अनुशासन तथा माता-पिता और गुरुजनों के प्रति सम्मान को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
रचनात्मक गतिविधियों से जुड़े युवा ही रहते हैं मजबूत: ममता पांगती नागर
कार्यक्रम को सामाजिक कार्यकर्ता ममता पांगती नागर ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि खाली समय और गलत संगत युवाओं को नशे की ओर ले जाती है। युवाओं को अपने समय का सदुपयोग करते हुए खेल, संगीत, कला, लेखन, योग और सामाजिक सेवा जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ना चाहिए।
उन्होंने बताया कि सकारात्मक और क्रिएटिव कार्यों में समय लगाने से न केवल आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि युवा मानसिक रूप से भी मजबूत बनते हैं।
नशे के खिलाफ लड़ाई सामूहिक जिम्मेदारी: एनसीबी
इस अवसर पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), देहरादून के इंस्पेक्टर मनोज बिष्ट ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून की नहीं, बल्कि समाज और युवाओं की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि एनसीबी लगातार ड्रग्स तस्करी पर रोक लगाने, नशा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाने का कार्य कर रहा है। आज ड्रग्स का जाल युवाओं को सोशल मीडिया, पार्टियों और गलत संगत के माध्यम से फंसाने की कोशिश करता है, इसलिए युवाओं को हर स्तर पर सतर्क रहने की जरूरत है।
संदिग्ध गतिविधियों की दें सूचना
इंस्पेक्टर मनोज बिष्ट ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे किसी भी तरह के दबाव, लालच या प्रयोग से दूर रहें। यदि कहीं नशे से जुड़ी गतिविधियां नजर आएं, तो उसकी सूचना संबंधित विभाग को दें। सही मित्रों का चयन, आत्मसंयम और जागरूकता ही नशे से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
विद्यार्थियों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार साझा किए। कई विद्यार्थियों ने कहा कि नशा पढ़ाई और भविष्य को बर्बाद कर देता है, जबकि कुछ ने बताया कि नशे के कारण परिवारों में तनाव और रिश्तों में दूरी आ जाती है। इन अनुभवों ने कार्यक्रम को और अधिक गंभीर व चिंतनशील बना दिया।
1000 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया नशामुक्त रहने का संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर सक्रिय रूप से भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं को सजग इंडिया की ओर से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। अंत में 1000 से अधिक विद्यार्थियों ने स्वयं नशे से दूर रहने और अपने मित्रों, परिवार व समाज को इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।
ये रहे उपस्थित गणमान्य
इस अवसर पर डीपीएस देहरादून के प्रधानाचार्य वी. के. सिंह, उप-प्रधानाचार्य सुजाता, उत्तराखंड पुलिस प्रतिनिधि प्रीतम चौहान, विशाल कुमार, विद्यालय के शिक्षक-कर्मचारीगण सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।










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