देहरादून। कभी अपनी अनोखी सुगंध, स्वाद और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध रही दून बासमती (Doon Basmati) अब एक बार फिर उत्तराखंड के खेतों में लौटती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संकल्प, जिला प्रशासन की पहल और किसानों की मेहनत से दून बासमती के पुनर्जीवन अभियान को नई सफलता मिल रही है।
वर्ष 2025 में हुए सफल ट्रायल के बाद इस बार 75 हेक्टेयर क्षेत्र में 160 किसान 2.2 दून बासमती की खेती कर रहे हैं। प्रशासन का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इसकी खेती का दायरा और बढ़ाना है।
75 हेक्टेयर में 160 किसान कर रहे हैं दून बासमती की खेती
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि दून बासमती के संरक्षण और संवर्धन के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। पिछले वर्ष हुए सफल ट्रायल के बाद इस वर्ष खेती का क्षेत्र बढ़ाकर 75 हेक्टेयर कर दिया गया है।
सहसपुर और विकासनगर के साथ अब रायपुर और डोईवाला के किसान भी इस पारंपरिक फसल की खेती के लिए आगे आए हैं।
2025 का ट्रायल रहा सफल, किसानों को मिला बेहतर दाम
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह के अनुसार वर्ष 2025 में करीब 65 हेक्टेयर क्षेत्र में 100 से अधिक किसानों ने दून बासमती की खेती की थी।
रीप (REAP) परियोजना के माध्यम से किसानों से 200 क्विंटल से अधिक दून बासमती धान ₹65 प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा गया। इसके बदले किसानों के खातों में 13 लाख रुपये से अधिक की राशि सीधे ट्रांसफर की गई।
विकासनगर में बनेगा सीड बैंक और टेस्टिंग लैब
दून बासमती के बेहतर संरक्षण और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए विकासनगर में सीड बैंक स्थापित किया जाएगा।
इसके अलावा दून बासमती की गुणवत्ता और सुगंध की वैज्ञानिक जांच के लिए टेस्टिंग सुविधा भी विकसित की जाएगी, जिससे किसानों को प्रमाणित बीज और बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा सके।
550 हेक्टेयर से घटकर रह गई थी खेती
मुख्य कृषि अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि एक समय दून बासमती की खेती करीब 550 हेक्टेयर में होती थी, लेकिन समय के साथ यह घटकर 150 से 200 हेक्टेयर तक सीमित रह गई।
अब जिला प्रशासन, कृषि विभाग और ग्रामोत्थान के संयुक्त प्रयासों से इसकी खेती को दोबारा बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है।
किसानों को मिल रहा प्रशासन का पूरा सहयोग
हरबर्टपुर के किसान सूर्य प्रकाश बहुगुणा ने बताया कि जिला प्रशासन, कृषि विभाग और ग्रामोत्थान किसानों को हर स्तर पर सहयोग दे रहे हैं। उनके क्षेत्र के 25 से 30 किसान इस अभियान से जुड़े हैं और भविष्य में खेती का क्षेत्र बढ़ने की उम्मीद है।
बीज से ब्रांडिंग तक होगी पूरी व्यवस्था
जिला प्रशासन दून बासमती के संरक्षण के लिए केवल खेती बढ़ाने पर ही नहीं बल्कि—
- गुणवत्तापूर्ण बीज संरक्षण
- वैज्ञानिक टेस्टिंग
- किसानों से सीधी खरीद
- बेहतर मार्केटिंग
- राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग
जैसे सभी पहलुओं पर एक साथ काम कर रहा है, ताकि किसानों की आय बढ़ाने के साथ देहरादून की पारंपरिक कृषि विरासत को भी संरक्षित किया जा सके।
दून बासमती केवल एक फसल नहीं बल्कि देहरादून की पहचान और कृषि विरासत है। वर्ष 2025 के सफल ट्रायल और 2026 में बढ़े खेती क्षेत्र ने यह उम्मीद जगा दी है कि आने वाले वर्षों में दून बासमती एक बार फिर देश और दुनिया में अपनी विशिष्ट सुगंध और गुणवत्ता के लिए नई पहचान बनाएगी।











