देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा लाया गया ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ अब राज्यसभा में पेश किया जाएगा। लोकसभा से पारित होने के बाद सरकार को उम्मीद है कि उच्च सदन में भी यह विधेयक आसानी से पारित हो जाएगा।
इस विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित बनाना है ताकि अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
लोकसभा से ध्वनि मत से हुआ पारित
एंटी पेपर लीक बिल पर लोकसभा में चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस हुई। चर्चा के बाद ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
सरकार का कहना है कि यह कानून परीक्षा में होने वाली धांधली और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद करेगा।
राज्यसभा में क्या है नंबर गेम?
राज्यसभा की कुल निर्धारित सदस्य संख्या 245 है, लेकिन वर्तमान में 3 सीटें रिक्त हैं। ऐसे में सदन में फिलहाल 242 सदस्य हैं।
सामान्य विधेयक पारित कराने के लिए 122 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है।
बताया जा रहा है कि एनडीए के पास राज्यसभा में लगभग 152 सांसदों का समर्थन है, जबकि विपक्षी गठबंधन के पास करीब 63 सांसद हैं। अन्य दलों के पास लगभग 29 सदस्य हैं।
इन आंकड़ों के आधार पर सरकार के पास विधेयक को पारित कराने के लिए पर्याप्त समर्थन माना जा रहा है।
एंटी पेपर लीक बिल में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?
सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन में पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के खिलाफ कई कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं।
मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं—
- पेपर लीक या परीक्षा में धांधली करने पर कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा।
- दोषियों पर 50 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
- संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले गिरोहों पर कम से कम 7 वर्ष की सजा का प्रावधान।
- ऐसे मामलों में 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
- जांच एजेंसियों को 60 दिनों के भीतर जांच पूरी करनी होगी।
- मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाएंगे ताकि रोजाना सुनवाई हो और मामलों का जल्द निपटारा हो सके।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि नए कानून से भर्ती परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा पेपर लीक करने वाले गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई संभव होगी। इसके साथ ही योग्य अभ्यर्थियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
लोकसभा से पारित होने के बाद अब सभी की निगाहें राज्यसभा की कार्यवाही पर हैं। यदि विधेयक उच्च सदन से भी पारित हो जाता है, तो देश में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित नकल के मामलों पर सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता और मजबूत हो जाएगा।











