गुजरात से बस्ती पहुंची पहली पत्नी, जयमाल के दौरान रोक दिया कार्यक्रम
सूत्रों के अनुसार, रेशमा को किसी परिचित के माध्यम से पता चला कि उसका पति पैकोलिया क्षेत्र में दूसरी शादी कर रहा है। जानकारी मिलते ही वह गुजरात से सीधे बस्ती पहुंची। जैसे ही जयमाल की रस्म शुरू हुई, रेशमा अचानक स्टेज पर चढ़ गई और दूल्हे पर धोखा देने, दहेज उत्पीड़न, और बिना तलाक दूसरी शादी रचाने की साजिश रचने का आरोप लगाने लगी।
इस अचानक हुई घटना से समारोह में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और मेहमान इधर-उधर भागने लगे।
वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची सूचना, पुलिस रही मूकदर्शक
हंगामा बढ़ने पर मामला एसपी बस्ती, एएसपी, और सीओ हरैया तक पहुंचा। निर्देश पर पैकोलिया पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन पुलिस ने शादी रोकने की कोई कार्रवाई नहीं की।
थानाध्यक्ष कृष्ण कुमार साहू का कहना था—
“पुलिस के पास विवाह रोकने का अधिकार नहीं है। दूसरी शादी वैध है या अवैध—यह केवल न्यायालय तय कर सकता है।”
यह बयान सुनकर रेशमा और उसके समर्थकों में और आक्रोश बढ़ गया।
पीड़िता की कहानी: “तीन साल पहले हुई थी कोर्ट मैरिज”
रेशमा ने बताया कि तीन साल पहले गुजरात में उसकी और दूल्हे की कोर्ट मैरिज हुई थी। कुछ समय सब ठीक चला, फिर पति का व्यवहार बदल गया और उसने अदालत में तलाक की अर्जी लगा दी, जिसका अभी फैसला नहीं हुआ है।
रेशमा का कहना है—
“तलाक हुए बिना दूसरी शादी करना अपराध है। कानून मेरे साथ है लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है।”
उसने पति के परिवार पर भी दूसरी शादी की पूर्व-योजना बनाने का आरोप लगाया।
कानूनी पहलू: बिना तलाक दूसरी शादी अपराध, लेकिन कार्रवाई का रास्ता कोर्ट से
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार—
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हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 494
तलाक के बिना दूसरी शादी करना दंडनीय अपराध है।
इसके तहत 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। -
लेकिन कार्रवाई केवल तब संभव है जब
पीड़ित व्यक्ति स्वयं कोर्ट में लिखित शिकायत दे। -
पुलिस अपने स्तर पर विवाह नहीं रोक सकती, क्योंकि यह मामला न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।
समारोह जारी रहा, पुलिस का रवैया सवालों में
रेशमा जयमाल स्टेज पर रोती रही, न्याय की मांग करती रही, लेकिन शादी की रस्में चलती रहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस चाहती तो धोखाधड़ी या दहेज उत्पीड़न की धाराओं में तत्काल कार्रवाई कर सकती थी, लेकिन उन्होंने इसे “परिवारिक विवाद” कहकर मामला टाल दिया।
पीड़िता की लड़ाई: “अब कोर्ट ही मेरा सहारा है”
रेशमा ने कहा कि वह:
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उच्चाधिकारियों से मिलेगी
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अदालत में केस दाखिल करेगी
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अपने पति और उसके परिवार पर सख्त कार्रवाई की मांग करेगी
वहीं पुलिस ने मामले को अदालत के निर्णय पर छोड़ दिया है।
घटना ने उठाए बड़े सवाल
यह घटना सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा, और पुलिस की ज़िम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है—
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क्या पुलिस की मौजूदगी में अवैध विवाह रोकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए थी?
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क्या एक महिला की शिकायत इतनी कमजोर है कि वह प्रशासन के सामने भी अनसुनी रह जाए?
फिलहाल, रेशमा गुजरात लौटने की तैयारी कर रही है और कानूनी लड़ाई के लिए तैयार है।










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