नई दिल्ली।
अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े वीआईपी विवाद पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तराखंड मामलों के प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बड़ा बयान दिया है। सोशल मीडिया और कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनके नाम को कथित तौर पर वीआईपी के रूप में जोड़ने पर उन्होंने कड़ा ऐतराज़ जताया है और इसे सोची-समझी साजिश करार दिया है।
दुष्यंत कुमार गौतम ने इस मामले में उत्तराखंड के गृह सचिव शैलेश बगौली को एक औपचारिक पत्र लिखते हुए आरोप लगाया है कि कुछ इंस्टाग्राम हैंडल, यूट्यूब चैनल और एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट्स उनके खिलाफ झूठी और भ्रामक सामग्री फैलाकर उनकी राजनीतिक व सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
फर्जी ऑडियो-वीडियो फैलाने का आरोप
पत्र में गौतम ने दावा किया है कि उनके खिलाफ फर्जी ऑडियो और वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे हैं, जो पूरी तरह असत्य और दुर्भावनापूर्ण हैं। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि ऐसी आपत्तिजनक सामग्री को तत्काल हटाया जाए और भविष्य में इसके प्रसारण पर सख्त रोक लगाई जाए।
उन्होंने यह भी आग्रह किया कि संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और टीवी चैनलों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं, ताकि किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को बिना प्रमाण नुकसान न पहुंचाया जा सके।
उर्मिला सनावर के वीडियो से शुरू हुआ विवाद
गौरतलब है कि यह विवाद उस समय सामने आया जब हरिद्वार के ज्वालापुर से पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी होने का दावा करने वाली महिला उर्मिला सनावर के कुछ वीडियो और ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इन सामग्रियों में उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए और ‘गट्टू’ नाम के व्यक्ति की पहचान उजागर करने का दावा किया था।
राजनीतिक हलचल तेज
मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है।
कांग्रेस पार्टी ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग की है, जो सर्वोच्च न्यायालय के किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराए जाने की बात कही गई है।
वहीं भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए उर्मिला सनावर की भूमिका को संदिग्ध करार दिया है और पार्टी का इससे कोई संबंध न होने की बात कही है।
फेसबुक पर भावुक बयान
दुष्यंत कुमार गौतम ने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर सामने आकर अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा—
“मेरे राजनैतिक एवं सामाजिक जीवन में ईमानदारी, निष्ठा और चरित्र ही मेरी पहचान रही हैं। आज मन की पीड़ा शब्दों के रूप में सामने आई है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी मेरी इस पीड़ा को समझते हुए, न्याय की इस लड़ाई में अन्याय के विरुद्ध मजबूती से मेरे साथ खड़े होंगे।”
अब आगे क्या?
फिलहाल गृह सचिव को भेजे गए पत्र के बाद यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और सोशल मीडिया पर फैल रही कथित आपत्तिजनक सामग्री पर किस स्तर तक रोक लगाई जाती है।










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