देहरादून।
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल कथित कॉल रिकॉर्डिंग और VIP एंगल के दावों के बाद सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इसी बीच कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार का पक्ष सामने रखा, लेकिन CBI जांच और VIP की भूमिका को लेकर कोई ठोस जवाब नहीं दिया।
कोर्ट के फैसले का हवाला, रिकॉर्डिंग पर सवाल
मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि इस मामले में न्यायालय का फैसला बिल्कुल स्पष्ट है। कोर्ट ने अपने निर्णय में यह दर्ज किया है कि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने का प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जिन कथित कॉल रिकॉर्डिंग के आधार पर मामला दोबारा उठाया जा रहा है, उनमें खुद विरोधाभास है।
उनके अनुसार,
“उसी कॉल रिकॉर्डिंग में कहीं आत्महत्या की बात कही जा रही है, तो कहीं हत्या की। जबकि अदालत ने इसे हत्या का मामला मानते हुए आरोपियों को सजा सुनाई है।”
सबूत सामने लाने की चुनौती
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी तरह की जांच से पीछे नहीं हट रही है, लेकिन आरोप लगाने वालों को पहले वैध और प्रमाणिक सबूत सामने लाने होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन इस मामले में नए तथ्य रखता है, तो पुलिस उसकी जांच करेगी।
“सरकार और पुलिस लगातार अपील कर रही है कि जो भी आरोप लगा रहा है, वह ठोस सबूत के साथ सामने आए।”
CBI जांच पर सरकार का रुख
CBI जांच के सवाल पर मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि जब हाईकोर्ट पहले ही SIT जांच को सही ठहरा चुका है, तो तथ्यों की प्रमाणिकता को देखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट भी गए, लेकिन अब तक किसी स्तर पर जांच में खामी साबित नहीं हुई।
उनका कहना था कि,
“अगर कोई नया और ठोस प्रमाण सामने आता है, तो सरकार हर तरह की जांच के लिए तैयार है।”
कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप
मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी पूरे प्रदेश की बेटी है और भाजपा का हर कार्यकर्ता उसके लिए न्याय चाहता है।
रिकॉर्डिंग जारी करने वालों को सुरक्षा का भरोसा
कथित कॉल रिकॉर्डिंग मामले में सुबोध उनियाल ने कहा कि जो लोग आरोप लगा रहे हैं, वे सामने आएं। सरकार उनकी पूरी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगी, लेकिन बिना सबूत केवल बयानबाजी से सच्चाई सामने नहीं आएगी।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
अंकिता भंडारी 18 सितंबर 2022 को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई थी। वह पौड़ी जिले के गंगा भोगपुर स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के पद पर कार्यरत थी। आरोप है कि रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके सहयोगियों सौरभ भास्कर व अंकित गुप्ता ने अंकिता पर अनैतिक दबाव बनाया, जिसका उसने विरोध किया। इसी के बाद उसकी हत्या कर दी गई।
अदालत ने इस मामले में तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है और फिलहाल सभी जेल में बंद हैं।
दिसंबर 2025 में फिर क्यों गरमाया मामला?
दिसंबर 2025 में यह मामला तब दोबारा चर्चा में आया जब बीजेपी से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर कॉल रिकॉर्डिंग के साथ वीडियो जारी किए। वीडियो में कथित VIP एंगल का दावा किया गया, जिससे प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया।
इसके बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू किया, वहीं सरकार की ओर से सफाई दी गई। मामले में अब सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर को नोटिस भी जारी किया जा चुका है.
अंकिता भंडारी हत्याकांड में अदालत का फैसला आ चुका है, लेकिन नए दावों और रिकॉर्डिंग के चलते मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। सरकार सबूतों की बात कर रही है, वहीं विपक्ष और सामाजिक संगठन पारदर्शिता और CBI जांच की मांग पर अड़े हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति में और तेज होने के संकेत दे रहा है।










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