उत्तराखंड में आज से चैत्र नवरात्रि 2026 का आगाज हो रहा है। इस अवसर पर पहाड़ और मैदान, दोनों क्षेत्रों में श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा और आराधना में लीन होंगे। पहले दिन कलश स्थापना के साथ ही माता शैलपुत्री की पूजा की जाएगी।
लेकिन इस साल नवरात्रि सिर्फ धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं रहेगा। सरकारी आंकड़ों में घटती बेटियों की संख्या ने समाज में लिंगानुपात को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसीलिए लोगों से आग्रह किया जा रहा है कि वे नवरात्रि की साधना के दौरान लड़कियों और बेटों के बीच संतुलन बनाए रखने का संकल्प भी लें।
उत्तराखंड में लिंगानुपात की स्थिति चिंताजनक
हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (HIMS) ने मार्च 2026 में उत्तराखंड के सभी जिलों का लिंगानुपात सार्वजनिक किया। आंकड़े बताते हैं कि 13 में से 11 जिलों में लिंगानुपात 950 से कम दर्ज किया गया है, यानी हर 1000 लड़कों के मुकाबले 950 से कम लड़कियां हैं।
तीन जिलों का लिंगानुपात तो 900 से भी कम है। यह स्थिति राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के 2020-21 के आंकड़ों की तुलना में और अधिक चिंताजनक है।
पलायन और सामाजिक कारण
अधिकारियों के अनुसार, पहाड़ी जिलों में लिंगानुपात कम होने के प्रमुख कारणों में पलायन और सामाजिक व्यवहार शामिल हैं। लोग बताते हैं कि लड़के सेना या बाहरी क्षेत्रों में चले जाते हैं, जिससे स्थानीय लिंगानुपात प्रभावित होता है।
हालांकि कुछ जिलों में जागरूकता अभियान चलाए गए थे, फिर भी हाल के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि लड़कियों की संख्या में कमी अभी भी गंभीर चुनौती बनी हुई है।
नवरात्रि के दौरान लिंगानुपात साधना
इस नवरात्रि, पहाड़ से लेकर मैदान तक सभी श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना करते हुए समाज में बेटियों के महत्व को समझने और संतुलित लिंगानुपात के लिए संकल्प लेने को प्रेरित किए जा रहे हैं।
लोगों से अपील है कि नवरात्रि की पूजा के साथ समान लिंगानुपात और बेटियों के अधिकार के लिए जागरूकता फैलाएं।













