देहरादून। राजधानी देहरादून के रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। नियमों की अनदेखी और फ्लैट खरीदारों से कथित धोखाधड़ी के आरोपों पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) रिंकी साहनी ने बड़ा कदम उठाते हुए कमल प्रिया ट्रैंक्विल स्पेसेस परियोजना से जुड़े 06 बिल्डरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट के निर्देश पर थाना डालनवाला पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
बाबा साहनी से जुड़ी कंपनी की परियोजना, सवालों के घेरे में बिल्डर
यह मामला 30, तिलक (तेग बहादुर) रोड स्थित कमल प्रिया ट्रैंक्विल स्पेसेस ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जिसे जुनेजा परिवार और साहनी कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किया जा रहा है। साहनी कंस्ट्रक्शंस का संबंध दिवंगत बिल्डर बाबा साहनी से बताया जा रहा है।
खरीदारों ने कोर्ट में लगाए गंभीर आरोप
फ्लैट खरीदार ललित सभरवाल, विनीत प्रसाद बिजल्वाण और श्वेता शर्मा ने अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल कर बिल्डरों पर कई गंभीर आरोप लगाए। शिकायत के अनुसार बिल्डरों ने विज्ञापनों और सोशल मीडिया के जरिए जिम, स्विमिंग पूल, मॉड्यूलर किचन, स्टिल्ट पार्किंग जैसी सुविधाओं का झांसा देकर करोड़ों रुपये वसूल किए।
खरीदारों ने वर्ष 2024 में हुए बिल्डर-बायर एग्रीमेंट के तहत क्रमशः 1.48 करोड़, 2.27 करोड़ और 1.72 करोड़ रुपये का भुगतान चेक के माध्यम से किया था। समझौते में फ्लैट के साथ भूमि का अनुपातिक अविभाजित हिस्सा और कॉमन एरिया में स्वामित्व अधिकार देने की शर्त भी शामिल थी।
कम्पलीशन सर्टिफिकेट के बाद भी नहीं हुई सेल डीड
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, 7 मई 2025 को एमडीडीए (MDDA) से कम्पलीशन सर्टिफिकेट मिलने के बावजूद बिल्डरों ने तय समय सीमा में सेल डीड निष्पादित नहीं की। इसी दौरान कई अनियमितताएं उजागर हुईं।
बिना ड्राफ्ट दिखाए कराई गई रजिस्ट्री, अधिकार गायब
खरीदार श्वेता शर्मा का आरोप है कि उनसे सेल डीड बिना ड्राफ्ट दिखाए साइन करवा ली गई। बाद में रजिस्ट्रार कार्यालय से दस्तावेज प्राप्त करने पर सामने आया कि डीड में भूमि स्वामित्व, रूफ राइट्स और कॉमन एरिया से जुड़े अधिकार शामिल ही नहीं थे।
नए टावर के लिए NOC का दबाव, धमकियों का आरोप
अन्य खरीदारों का आरोप है कि बिल्डरों द्वारा नए टावर के निर्माण के लिए एनओसी देने का दबाव बनाया गया। एनओसी देने से इनकार करने पर सेल डीड न करने की धमकी दी गई। इतना ही नहीं, परियोजना के पीछे की दीवार तोड़कर नया निर्माण शुरू कर दिया गया, जिसे खरीदारों ने आवासीय भूमि के व्यावसायिक इस्तेमाल की कोशिश बताया।
पुलिस की निष्क्रियता पर कोर्ट ने लिया संज्ञान
खरीदारों ने 12 दिसंबर को थाना डालनवाला और 15 दिसंबर को एसएसपी देहरादून को शिकायत दी थी, लेकिन कार्रवाई न होने पर उन्होंने कोर्ट का रुख किया। CJM कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए BNSS की प्रासंगिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए।
जांच में जुटी डालनवाला पुलिस
कोर्ट आदेश के बाद डालनवाला थाना पुलिस ने आरोपित बिल्डरों, परियोजना से जुड़े दस्तावेजों, एमडीडीए स्वीकृतियों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जाएगी।
रेरा और एमडीडीए नियमों के उल्लंघन का आरोप
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खरीदारों के कॉमन एरिया और भूमि स्वामित्व अधिकारों में कटौती की गई है, तो यह रेरा कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। रेरा के तहत बिल्डरों पर पारदर्शिता और खरीदारों के हितों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तय की गई है।











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