बिना रेडियोलॉजिस्ट 26 अल्ट्रासाउंड! बड़ा खुलासा
निरीक्षण टीम ने पाया कि केंद्र में रेडियोलॉजिस्ट की गैरमौजूदगी में 26 मरीजों के अल्ट्रासाउंड कर दिए गए।
यह न केवल PCPNDT अधिनियम का सीधा उल्लंघन है, बल्कि एक दंडनीय अपराध भी है।
टीम को ANC रजिस्टर और फॉर्म पर रेडियोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर भी नहीं मिले, जिससे संभावित हेराफेरी और गंभीर लापरवाही की आशंका और स्पष्ट हो गई।
‘CCTV खराब है’—स्टाफ की कहानी पर प्रशासन को शक, अल्ट्रासाउंड रूम सील
जब अधिकारियों ने CCTV फुटेज मांगी, तो स्टाफ ने कैमरों के खराब होने का बहाना बना दिया।
प्रशासन ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए:
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अल्ट्रासाउंड कक्ष को मौके पर ही सील किया
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चाबी कब्जे में ली
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केंद्र को 3 दिनों में लिखित स्पष्टीकरण देने का नोटिस जारी किया
पिछले वर्ष भी सामने आया था गंभीर मामला—MRI रिपोर्ट में भारी गड़बड़ी
यह पहला विवाद नहीं है। पिछले वर्ष भी सत्यम डायग्नोस्टिक सेंटर से जुड़ा एक बड़ा मामला चर्चा में आया था, जब मरीज के परिजनों को Brain MRI की जगह Pelvis MRI रिपोर्ट थमा दी गई।
जब परिजनों ने आपत्ति जताई तो कुछ देर बाद उन्हें Brain MRI रिपोर्ट दे दी गई।
केंद्र प्रबंधन ने सफाई दी—
“एक ही नाम के दो मरीज थे, इसलिए गलती हो गई।”
लेकिन जब परिजनों ने पूछा—
“अगर दो लोग एक ही नाम, उम्र, कास्ट और लिंग के थे, तो दोनों की **ID एक जैसी कैसे हो गई?”
इस सवाल का प्रबंधन के पास कोई जवाब नहीं था। इस घटना ने तभी से इस सेंटर की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
प्रशासन की ढिलाई बढ़ा रही मनमानी
हल्द्वानी में कई डायग्नोस्टिक सेंटरों पर:
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गलत रिपोर्ट देने,
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नियमों की अनदेखी,
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और मनमानी संचालन
की शिकायतें लंबे समय से उठती रही हैं। लेकिन आरोप है कि सरकारी तंत्र वर्षों से इन शिकायतों पर कार्रवाई करने में सुस्ती दिखाता रहा, जिसके चलते कई केंद्र बेखौफ होकर नियमों की धज्जियां उड़ाते रहे।
शुक्रवार की कार्रवाई के बाद फिर वही सवाल उठ खड़ा हुआ है—











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