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उत्तराखंड कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को एक बड़ी राहत मिली है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उनकी पत्नी से जुड़ी संपत्ति की कुर्की के आदेश पर रोक लगा दी है।
ईडी ने आरोप लगाया था कि हरक सिंह रावत की पत्नी, दीप्ति रावत, ने साजिश के तहत देहरादून में बेहद कम कीमत पर जमीन खरीदी है। इस मामले में ईडी ने 20 जनवरी 2025 को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए श्रीमती पूर्णा देवी मेमोरियल ट्रस्ट की 101 बीघा ज़मीन को अनंतिम रूप से कुर्क कर दिया था, जिसकी अनुमानित कीमत 70 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
यह ज़मीन दून इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नामक संस्थान के अंतर्गत आती है, जिसे ईडी के अनुसार, हरक सिंह रावत के परिजनों और नजदीकी लोगों द्वारा नियंत्रित ट्रस्ट संचालित करता है।
ट्रस्ट की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि पीएमएलए की धारा 5(1)(बी) के आवश्यक तत्वों का अनुपालन नहीं किया गया। इस धारा के अंतर्गत यह आवश्यक है कि यह विश्वास हो कि संपत्ति को छिपाया, स्थानांतरित या नष्ट किया जा सकता है, जिससे जब्ती की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है।
अदालत ने माना कि ईडी द्वारा जारी अनंतिम कुर्की आदेश में इस आवश्यक आधार का उल्लेख नहीं है। कोर्ट ने इस आधार पर ईडी की कार्रवाई को फिलहाल रोकते हुए कहा कि मामला विचारणीय है और इस पर विस्तृत बहस की आवश्यकता है।
कोर्ट ने ईडी को दो सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई के लिए 14 मई 2025 की तिथि निर्धारित की है।
कोर्ट के आदेश में कहा गया है, “अगली सुनवाई तक ईडी द्वारा 20 जनवरी 2025 को जारी अनंतिम कुर्की आदेश के प्रभाव और संचालन पर रोक लागू रहेगी।”