उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस के भीतर टिकट वितरण की चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। इसी बीच कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत का एक बयान राजनीतिक गलियारों में खासा चर्चा में है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि टिकट किसी की सिफारिश या नजदीकी के आधार पर नहीं, बल्कि जीतने की क्षमता के आधार पर दिया जाएगा।
कार्यकर्ताओं के एक कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि पार्टी के कुछ नेता अभी से यह दावा कर रहे हैं कि उनका टिकट फाइनल हो चुका है, और इसके लिए वे राहुल गांधी व कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का नाम भी ले रहे हैं। इस पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा—
“अरे, टिकट तो राहुल गांधी का भी फाइनल नहीं है।”
सिफारिशें आ रही हैं, लेकिन फैसला जीत की क्षमता पर होगा
डॉ. रावत ने बताया कि उनके पास लगातार टिकट के लिए सिफारिशें आ रही हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस में टिकट उसी को मिलेगा जो चुनाव जीतने का दम रखता हो।
उन्होंने कहा कि चाहे कोई उनका करीबी हो, प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा (गोदियाल) का हो या पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह का—निर्णय केवल योग्यता और जीत की संभावना के आधार पर लिया जाएगा।
“मैं पार्टी का सिपाही हूं” – हरक सिंह रावत
अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट करते हुए हरक सिंह रावत ने कहा,
“मैं पार्टी का सिपाही हूं। जिस सीट से कोई चुनाव नहीं लड़ेगा, वहां से मैं लडूंगा। और अगर जरूरत पड़ी तो पार्टी के लिए दरी बिछाऊंगा और नारे लगाऊंगा।”
उन्होंने कहा कि पार्टी हित सर्वोपरि है और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा उससे ऊपर नहीं हो सकती।
नारों पर भी दी सफाई
कार्यक्रम के दौरान नारे लगाने को लेकर उठे सवालों पर भी डॉ. रावत ने खुलकर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा (गोदियाल) के लिए नारे लगाना मतलब पार्टी के लिए नारे लगाना है। वहीं ज्योति रौतेला के समर्थन में नारे लगाने को उन्होंने महिलाओं के समर्थन से जोड़ा।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा बयान
हरक सिंह रावत का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान कांग्रेस के भीतर अनुशासन और पारदर्शिता का स्पष्ट संदेश देता है, साथ ही टिकट को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लगाने की कोशिश है।












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