शनिवार सुबह पोस्टमार्टम के लिए पहुंचे परिजन शव के चेहरे, सिर और एक आंख पर गहरे घाव देखकर भड़क उठे। आसपास चूहे दौड़ते मिले, जिसके बाद परिजनों को साफ अंदाजा हो गया कि रात के समय शव को चूहों ने गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है।
मौत के बाद मोर्चरी में रखवाया गया था शव
जानकारी के अनुसार, लखन शर्मा शुक्रवार शाम अचानक हृदयगति रुकने (Cardiac Arrest) से गिर पड़े थे। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। देर शाम परिजन शव को जिला अस्पताल मोर्चरी में पोस्टमार्टम के लिए ले गए, लेकिन देर होने के कारण प्रक्रिया अगले दिन सुबह तय की गई।
सुबह मोर्चरी में दिखा भयावह दृश्य
शनिवार सुबह जब परिवार पोस्टमार्टम कराने पहुंचा तो पूरा परिवार सदमे में आ गया।
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चेहरे पर गहरे घाव
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एक आंख पर चोट जैसे निशान
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सिर की त्वचा तक उधड़ी हुई
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और मोर्चरी में इधर-उधर दौड़ते चूहे
परिजनों ने तुरंत हंगामा शुरू कर दिया और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।
अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय कांग्रेस नेता भी मौके पर पहुंचे और मोर्चरी के बाहर स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी हुई।
परिजनों और कार्यकर्ताओं ने कहा कि—
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मोर्चरी की सुरक्षा व्यवस्था शून्य है
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सफाई की हालत बेहद खराब है
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शव संरक्षण की कोई उचित व्यवस्था नहीं
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जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे
प्रदर्शनकारियों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, मोर्चरी की प्रणालीगत जांच, और जिम्मेदार कर्मचारियों के निलंबन की मांग की।
परिजनों का आरोप: “शव भी सुरक्षित नहीं, यह कैसा अस्पताल?”
परिवार का कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि “अमानवीयता” है।
उनका कहना है कि—
“अगर मोर्चरी में शव भी सुरक्षित नहीं, तो अस्पताल की बाकी सेवाओं की क्या हालत होगी?”
स्वास्थ्य विभाग की छवि पर फिर उठे सवाल
यह घटना स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़ा करती है, खासकर तब जब कई बार मोर्चरी की खराब हालत को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी हैं। चूहों का शव तक पहुंच जाना यह दर्शाता है कि—
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मॉनिटरिंग कमजोर है
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सफाई व्यवस्था अस्त-व्यस्त है
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सिक्योरिटी और कंट्रोल सिस्टम फेल है









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