आज के समय में क्रेडिट कार्ड सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। शॉपिंग हो या ऑनलाइन पेमेंट, ट्रैवल बुकिंग हो या इमरजेंसी खर्च—हर जगह क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इसकी बड़ी वजह है क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाले डिस्काउंट, कैशबैक और रिवॉर्ड पॉइंट्स।
हालांकि, जितने फायदे क्रेडिट कार्ड के हैं, उतना ही नुकसान गलत इस्तेमाल से हो सकता है। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि क्रेडिट कार्ड लिमिट कैसे तय होती है और लिमिट बढ़वाने के लिए क्या करना चाहिए।
किन आधारों पर तय होती है क्रेडिट कार्ड की लिमिट?
बैंक और वित्तीय संस्थान किसी भी ग्राहक को क्रेडिट कार्ड देने से पहले कई फैक्टर्स का आकलन करते हैं। इन्हीं के आधार पर क्रेडिट कार्ड की लिमिट तय की जाती है।
1. मंथली इनकम और नौकरी की स्थिरता
ग्राहक की मासिक आय और नौकरी की स्थिति बैंक के लिए सबसे अहम होती है। स्थायी नौकरी और बेहतर सैलरी होने पर ज्यादा लिमिट मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
2. क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score)
क्रेडिट स्कोर क्रेडिट कार्ड लिमिट तय करने में अहम भूमिका निभाता है। ज्यादा और मजबूत क्रेडिट स्कोर होने पर बैंक आपको ज्यादा लिमिट ऑफर कर सकता है।
3. खर्च करने की आदत और लेनदेन का रिकॉर्ड
आप क्रेडिट कार्ड का कितना और किस तरह इस्तेमाल करते हैं, यह भी बैंक देखते हैं। नियमित और संतुलित खर्च लिमिट बढ़ाने में मदद करता है।
4. मौजूदा लोन और देनदारियां
अगर आपके ऊपर पहले से होम लोन, पर्सनल लोन या अन्य EMI चल रही हैं, तो बैंक उसी हिसाब से क्रेडिट कार्ड की लिमिट तय करता है।
क्रेडिट कार्ड की लिमिट कैसे बढ़वाएं?
अगर आप चाहते हैं कि बैंक आपकी क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाए, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है—
- सभी बिल और EMI समय पर चुकाएं
लेट पेमेंट से क्रेडिट स्कोर खराब होता है, जिससे लिमिट बढ़ने में दिक्कत आती है। - पूरी लिमिट का इस्तेमाल न करें
क्रेडिट कार्ड की केवल 30–40 प्रतिशत लिमिट का ही इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। - खर्च में बढ़ोतरी बैंक को दिखाएं
नियमित और जिम्मेदार खर्च से बैंक को संकेत मिलता है कि आप ज्यादा लिमिट संभाल सकते हैं। - लिमिट बढ़ाने के लिए आवेदन करें
कई बार बैंक ऑटोमैटिकली लिमिट नहीं बढ़ाते, इसके लिए आपको बैंक में रिक्वेस्ट डालनी पड़ती है।
क्रेडिट कार्ड का सही और जिम्मेदार इस्तेमाल न सिर्फ आपके खर्च को आसान बनाता है, बल्कि क्रेडिट स्कोर और लिमिट दोनों को बेहतर करता है। अगर आप समय पर भुगतान करते हैं और लिमिट के भीतर खर्च रखते हैं, तो बैंक खुद आपको ज्यादा क्रेडिट लिमिट ऑफर कर सकता है।










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