पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार क्षेत्र में खनन विभाग ने अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए पट्टाधारी पर ₹1,65,89,744 का भारी अर्थदंड प्रस्तावित किया है। यह कदम सुखरौ नदी किनारे लगातार हो रही अवैध खनन गतिविधियों की शिकायतों के बाद उठाया गया।
सिंचाई, राजस्व और खनन विभाग की संयुक्त टीम ने मैसर्स त्रिलोक इंटरप्राइजेज (प्रो. लोकपाल सिंह रावत) द्वारा संचालित स्वीकृत खनन लॉट का निरीक्षण किया। जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ सामने आईं, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
निरीक्षण में सामने आईं बड़ी अनियमितताएँ
✔ सीमांकन पिलर गायब
टीम को मौके पर कई सीमांकन पिलर टूटे और गायब मिले, जो खनन क्षेत्र की सीमा निर्धारण के लिए अनिवार्य होते हैं।
✔ प्रतिबंधित क्षेत्रों में खनन
प्रतिबंधित जोन में बड़े पैमाने पर उपखनिज का उत्खनन पाया गया।
✔ स्वीकृत गहराई का उल्लंघन
पट्टाधारी को अधिकतम 2 मीटर तक खनन की अनुमति थी, जबकि कई स्थानों पर 3.5 मीटर तक गहराई में अवैध उत्खनन किया गया। इससे
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सिंचाई विभाग की बाढ़ सुरक्षा दीवार
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कई CC ब्लॉक्स
को नुकसान का खतरा पैदा हो गया।
84,240 टन अवैध उपखनिज उठान का खुलासा
स्वीकृत क्षेत्र में लगभग:
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300 मीटर लंबाई
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60 मीटर चौड़ाई
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2.6 मीटर गहराई
तक अवैध सेन्ड उठान पाई गई, जिसका अनुमानित मात्रा 84,240 टन है।
जबकि ई-रवन्ना पोर्टल के अनुसार केवल 48,655.2 टन उपखनिज की ही वैध निकासी दर्ज है।
इस आधार पर 35,584.8 टन अवैध विक्रय पर ₹99,63,744 दंड प्रस्तावित किया गया।
अन्य दंड और अनियमितताएँ
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प्रतिबंधित क्षेत्र से 14,850 टन अवैध खनन → ₹41,58,000 दंड
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अपस्ट्रीम क्षेत्र से 8,100 टन अवैध उत्खनन → ₹22,68,000 दंड
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रिकॉर्ड में गड़बड़ियाँ, CCTV फुटेज उपलब्ध न कराना और पिलरों का रख-रखाव न करना → ₹2,00,000 दंड
विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश
विभाग ने पट्टाधारी को निर्देश दिए हैं कि वह एक सप्ताह के भीतर
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पूरा विक्रय विवरण
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CCTV फुटेज
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रख-रखाव व सीमांकन से जुड़े सभी रिकॉर्ड
प्रस्तुत करे।
यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो विभाग अर्थदंड अधिरोपित कर वसूली प्रक्रिया शुरू करेगा।
खनन माफियाओं के खिलाफ सख्त संदेश
यह कार्रवाई प्रदेश में सक्रिय खनन माफियाओं के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। खनन विभाग ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर इसी तरह कड़ी कार्रवाइयाँ आगे भी जारी रहेंगी।














