देहरादून/गदरपुर। उत्तराखंड भाजपा के अंदर गुटबाजी का नया दौर शुरू हो गया है। गदरपुर विधायक अरविंद पांडे के समर्थन में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का आना, अब सिर्फ राजनीतिक झगड़ा नहीं बल्कि नैतिक और कानूनी विवाद बनता जा रहा है।
दरअसल, पांडे पर अवैध भूमि कब्जे और किसान परिवार की जमीन हड़पने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इसी बीच भाजपा के दिग्गज नेताओं का उनके समर्थन में गदरपुर पहुंचना, पार्टी की छवि और “कानून का राज” पर सवाल खड़े कर रहा है।
क्या यह भाजपा की नीति के खिलाफ है?
पार्टी की “अतिक्रमण मुक्त उत्तराखंड” नीति के बीच ऐसे आरोपों वाले नेता का समर्थन करना, कई राजनीतिक विशेषज्ञों को विवादित और अनैतिक लग रहा है।
उधर, पांडे ने खुद आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर न्याय की मांग की है।
अतिक्रमण हटाने का नोटिस और हाईकोर्ट का आदेश
ऊधम सिंह नगर जिला प्रशासन ने पांडे के गूलरभोज स्थित कैंप ऑफिस पर अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया है।
यह कार्रवाई नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप की जा रही है, जिसमें सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण हटाने का निर्देश है।
पांडे ने इसे राजनीतिक दबाव बताया है और कार्रवाई को सरकार की साजिश करार दिया है।
और भी गंभीर आरोप: किसान परिवार ने लगाई जमीन कब्जाने की शिकायत
एक किसान परिवार ने पांडे पर अपनी जमीन कब्जा करने, धमकी देने और धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार ने कहा है कि अगर न्याय नहीं मिला तो वे आत्महत्या तक कर सकते हैं।
इसके अलावा एक अन्य भाजपा नेता ने भी पांडे पर जमीन कब्जाने का आरोप लगाया है, जिससे विवाद और बढ़ गया है।
गदरपुर में “घी-खिचड़ी भोज” पर सियासी चर्चा
22 जनवरी को पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक का पांडे के घर “घी-खिचड़ी भोज” कार्यक्रम तय है।
राजनीतिक गलियारों में इसे गुटबाजी का खुला प्रदर्शन माना जा रहा है।
कानून और राजनीति के बीच फंसी भाजपा
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पांडे पर कार्रवाई हुई तो पार्टी में विद्रोह हो सकता है, और अगर नहीं हुई तो सरकार की विश्वसनीयता पर असर पड़ेगा।
और सबसे अहम बात: अमित शाह के दौरे के दौरान यह घटना हाईकमान के लिए संवेदनशील संदेश है।
विश्लेषक का बयान
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अनीता जोशी कहती हैं:
“यह भाजपा की आंतरिक कलह का नया आयाम है। आरोपों वाले नेता का समर्थन पार्टी के ‘कानून का राज’ के दावे पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। हाईकमान को जल्द हस्तक्षेप करना होगा, नहीं तो 2027 चुनाव से पहले संगठन कमजोर हो सकता है।”
अगला कदम क्या होगा?
आज गदरपुर में होने वाली मुलाकात का नतीजा तय करेगा कि यह किसी ‘घुटन’ की शुरुआत है या भाजपा हाईकमान किसी बड़े निर्णय की ओर बढ़ेगा।










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