देहरादून। आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। खास बात यह है कि उत्तराखंड भाजपा के संगठनात्मक कौशल का उपयोग अब अन्य राज्यों में भी किया जा रहा है। पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता पश्चिम बंगाल, असम और केरल जैसे राज्यों में बूथ प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा उत्तराखंड इकाई के बूथ प्रबंधन मॉडल की कई बार सराहना की जा चुकी है। यही वजह है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में उत्तराखंड के अनुभवी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार के अनुसार, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के नेतृत्व में टीम भेजी गई है, जिसमें युवा मोर्चा के लगभग 20 पदाधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा असम में 15 सदस्यीय टीम को तैनात किया गया है, जबकि केरल में भी एक पदाधिकारी को विशेष जिम्मेदारी दी गई है।
इस बीच, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी जल्द ही चुनावी मैदान में सक्रिय नजर आएंगे। उन्हें पार्टी द्वारा स्टार प्रचारक के रूप में पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में जनसभाओं के लिए भेजा जाएगा। उनकी सभाओं के जरिए पार्टी मतदाताओं तक अपनी नीतियों और योजनाओं को प्रभावी तरीके से पहुंचाने की रणनीति बना रही है।
बूथ प्रबंधन में उत्तराखंड मॉडल की मांग
उत्तराखंड भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका बूथ स्तर का मजबूत संगठन माना जाता है। ‘पन्ना प्रमुख’ और ‘बूथ लेवल एजेंट (BLA)’ जैसे मॉडल को पार्टी ने जमीनी स्तर पर बेहद प्रभावी ढंग से लागू किया है। यही कारण है कि दूसरे राज्यों में भी इस मॉडल को लागू करने के लिए उत्तराखंड के कार्यकर्ताओं को भेजा जा रहा है।
SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) की तैयारी तेज
वहीं, चुनाव आयोग द्वारा प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी भाजपा पूरी तरह सक्रिय हो गई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में मंत्रियों और विधायकों की एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की जा चुकी है।
अब पार्टी जिला स्तर पर बूथ लेवल एजेंट और पन्ना प्रमुखों की कार्यशालाएं आयोजित करने जा रही है, ताकि मतदाता सूची को अपडेट करने और चुनावी रणनीति को और मजबूत बनाया जा सके। पार्टी का मानना है कि जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ ही चुनावी सफलता की कुंजी है।













