प्रीमेच्योर डिलीवरी के बढ़ते मामले
हाल के सर्वे और हेल्थ डेटा में यह बात सामने आई है कि गर्भवती महिलाओं में समय से पहले प्रसव के मामले बढ़ रहे हैं। प्रीमेच्योर डिलीवरी वह स्थिति है जब बच्चा 36 सप्ताह से पहले जन्म ले लेता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार:
-
पिछले एक वर्ष में हुई डिलीवरी में से लगभग 18% से अधिक बच्चे तय समय से पहले पैदा हुए
-
कई मामलों में बच्चे 28 से 32 सप्ताह के बीच जन्म ले रहे हैं
-
जितना जल्दी जन्म होता है, जोखिम उतना बढ़ जाता है
विशेषज्ञ बताते हैं कि हवा में मौजूद जहरीले कण शरीर में प्रवेश कर खून के जरिए गर्भस्थ शिशु तक पहुंचते हैं, जिससे गर्भावस्था प्रभावित होती है।
प्रदूषण कैसे बढ़ाता है प्रीमेच्योर डिलीवरी का खतरा?
गर्भवती महिलाओं पर प्रदूषण कई तरह से प्रभाव डालता है:
-
शरीर में जाने वाले प्रदूषक तत्व इम्युनिटी को कमजोर करते हैं
-
हवा की खराब गुणवत्ता से खांसी–जुकाम और सांस की समस्या बढ़ जाती है
-
लगातार खांसी भी गर्भ पर दबाव डाल सकती है
-
शरीर में ऑक्सीजन का लेवल प्रभावित होने से शिशु तक सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती
-
पोषण की कमी और कमजोरी भी प्रीमेच्योर डिलीवरी की संभावना बढ़ाती है
प्रीमेच्योर जन्मे बच्चों में बढ़ सकती हैं ये समस्याएं
समय से पहले जन्मे शिशुओं को सामान्य बच्चों की तुलना में कई अतिरिक्त स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे:
-
बाहरी तापमान सहन न कर पाना
-
हाइपोथेर्मिया
-
पीलिया
-
इंफेक्शन का तेजी से होना
-
वजन कम होना
-
आंखों की रोशनी पर असर या रेटिना कमजोर होना
-
मानसिक विकास (IQ) पर प्रभाव
इन बच्चों को पैदा होते ही विशेष देखभाल और निगरानी की आवश्यकता होती है।
गर्भवती महिलाएं कैसे रखें सावधानी?
प्रीमेच्योर डिलीवरी के जोखिम को कम करने के लिए गर्भवती महिलाएं निम्न कदम अपना सकती हैं:
✔ नियमित जांच करवाएं
✔ डॉक्टर की सलाह के अनुसार सप्लीमेंट लें
✔ एनीमिया से बचने के लिए आयरन और फोलिक एसिड का सेवन करें
✔ हरी सब्जियां, दूध, दही और पौष्टिक भोजन लें
✔ प्रदूषण वाले इलाकों में कम से कम जाएं
✔ घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें
✔ घर में एयर प्यूरीफिकेशन का ध्यान रखें
प्रदूषण केवल पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है। समय रहते सावधानी, पोषण और मेडिकल गाइडेंस अपनाकर प्रीमेच्योर डिलीवरी के मामलों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए यह जरूरी है कि वे अपने स्वास्थ्य और वातावरण दोनों का खास ध्यान रखें।










Discussion about this post