रिपोर्ट: कमल जगाती
नैनीताल | उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने नैनीताल के चर्चित नाबालिग यौन शोषण मामले में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी मो. उस्मान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने मामले को गंभीर और जघन्य प्रकृति का मानते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इस प्रकरण से संबंधित ट्रायल को तीन माह के भीतर निस्तारित किया जाए।
क्या है पूरा मामला?
मामले के अनुसार, 30 अप्रैल 2025 को नैनीताल के मल्लीताल कोतवाली में नाबालिग से दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत में 12 वर्षीय हिंदू नाबालिग ने 73 वर्षीय मो. उस्मान पर 12 अप्रैल 2025 को दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
घटना के बाद बढ़ा था तनाव
घटना के सामने आने के बाद मल्लीताल क्षेत्र में भारी आक्रोश देखने को मिला। कोतवाली के बाहर प्रदर्शन हुए और आंदोलन के दौरान कुछ दुकानों में हल्की तोड़फोड़ तथा कुछ लोगों के साथ मारपीट की घटनाएं भी सामने आईं।
1 मई को आरोपी को फांसी देने की मांग को लेकर शहर में एक बड़ा जुलूस निकाला गया, जिसके बाद क्षेत्र का माहौल तनावपूर्ण हो गया था। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी थी।
पहले भी लंबित रही जमानत याचिका
मो. उस्मान की जमानत याचिका लंबे समय से लंबित थी। जानकारी के अनुसार, कुछ न्यायाधीशों ने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग भी कर लिया था। अब एकलपीठ द्वारा जमानत खारिज किए जाने के बाद आरोपी के पास सर्वोच्च न्यायालय में अपील का विकल्प शेष है।
पीड़ित पक्ष की प्रतिक्रिया
पीड़िता के अधिवक्ता पंकज चौहान ने बताया कि न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज करते हुए राज्य सरकार को तीन माह के भीतर ट्रायल पूरा कराने के निर्देश दिए हैं, जिससे पीड़ित पक्ष को शीघ्र न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।











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