उत्तराखंड में एक बार फिर सरकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र में पशु वैक्सीनेशन के नाम पर लाखों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण का खुलासा आरटीआई (सूचना का अधिकार) के जरिए हुआ है, जिसके बाद पशुपालन विभाग में हड़कंप मच गया है।
आरटीआई से सामने आई अनियमितताओं की परतें
लक्सर क्षेत्र के भूरना गांव निवासी अधिवक्ता विनीत चौधरी ने पशुपालन विभाग से पशु वैक्सीनेशन से संबंधित जानकारी आरटीआई के तहत मांगी थी। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से वैक्सीनेशन का पूरा विवरण चाहा, लेकिन आरोप है कि विभाग ने लंबे समय तक सूचना देने में टालमटोल की।
सूचना न मिलने पर विनीत चौधरी ने मामले की शिकायत सीधे पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा से की। इसके बाद विभाग हरकत में आया और आरटीआई से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
एक ही मोबाइल नंबर, कई नाम दर्ज
आरटीआई से मिले दस्तावेजों की जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
शिकायतकर्ता के अनुसार—
- सैकड़ों ऐसे लोगों के नाम दर्ज मिले, जो संबंधित गांव के निवासी नहीं हैं
- एक ही मोबाइल नंबर पर कई लोगों के नाम से वैक्सीनेशन दिखाया गया
- कुछ ऐसे लोगों के नाम भी सूची में शामिल हैं, जिनके यहां पशुपालन होता ही नहीं
इन तथ्यों ने वैक्सीनेशन के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भूरना गांव में ही लाखों रुपये के घोटाले का आरोप
विनीत चौधरी का आरोप है कि सिर्फ भूरना गांव में ही पशु वैक्सीनेशन के नाम पर लाखों रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया है। उन्होंने जांच से जुड़े सभी दस्तावेज मौके पर पहुंचे अधिकारियों को सौंप दिए हैं।
जांच के लिए लक्सर पहुंचे अपर निदेशक
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर निदेशक, पशुपालन विभाग (गढ़वाल परिक्षेत्र) भूपेंद्र सिंह जंगपांगी लक्सर पहुंचे और जांच शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि—
“भूरना गांव में वैक्सीनेशन को लेकर अनियमितताओं की शिकायत प्राप्त हुई थी। जिस व्यक्ति को यह कार्य सौंपा गया था, उसे 4000 से अधिक वैक्सीन दी गई थीं, जिनका विवरण ऑनलाइन अपलोड किया गया है। अब सभी तथ्यों की स्थल पर जाकर जांच की जाएगी।”
जिम्मेदारी तय होगी, दोषियों पर गिरेगी गाज
जब अपर निदेशक से पूछा गया कि क्या इस मामले में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी, तो उन्होंने साफ कहा कि—
“देखरेख और निगरानी विभाग की जिम्मेदारी है। जांच के हर बिंदु को गंभीरता से देखा जाएगा और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।”
सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत उजागर
आरटीआई के जरिए सामने आया यह मामला न केवल पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करता है।
अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.









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