नैनीताल। उत्तराखंड में वन विभाग के शीर्ष पद PCCF/Head of Forest Force (HoFF) की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद अब केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) की ओर बढ़ गया है। नैनीताल हाईकोर्ट ने IFS अधिकारी की याचिका को यह कहते हुए वापस ले लिया कि इस प्रकार के सेवा संबंधी मामलों की सुनवाई CAT के अधिकार क्षेत्र में होती है।
सीनियरिटी विवाद को लेकर दाखिल हुई थी याचिका
1992 बैच के IFS अधिकारी ने राज्य सरकार के उस निर्णय को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें HoFF पद की नियुक्ति में नजरअंदाज कर उनसे जूनियर अधिकारी को इस पद पर प्रमोट किया गया था।
याचिकाकर्ता का कहना था कि यह फैसला सीनियरिटी नियमों के विरुद्ध है।
हाईकोर्ट ने पूछा—जब उपाय CAT में है तो याचिका यहां क्यों?
सुनवाई के दौरान माननीय न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आलोक माहरा की खंडपीठ ने सबसे पहले यह स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों के लिए Administrative Tribunals Act, 1985 के तहत CAT ही उचित मंच है।
कोर्ट ने पूछा:
“जब वैधानिक उपाय CAT में उपलब्ध है तो यह याचिका हाईकोर्ट में क्यों सुनी जाए?”
याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ली, CAT में जाएंगे
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि—
- वे याचिका वापस लेना चाहते हैं
- और अगले ही दिन CAT प्रिंसिपल बेंच, दिल्ली में मूल आवेदन दायर करेंगे
उन्होंने यह भी कहा कि CAT की नैनीताल सर्किट बेंच महीने में सिर्फ एक बार बैठती है, जिससे मामले में देरी हो सकती है।
कोर्ट ने CAT को जल्द सुनवाई का संकेत दिया
कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता CAT में आवेदन दायर करते हैं तो:
“मामले की तात्कालिकता को देखते हुए नैनीताल सर्किट बेंच में इसे प्राथमिकता के आधार पर सुना जाएगा।”
इसके साथ ही बीपी गुप्ता को बायोडायवर्सिटी में दी गई स्थानांतरण जिम्मेदारी वापस ले ली है. 10 दिसंबर को जारी आदेशों को स्थगित करते हुए बीपी गुप्ता को पूर्व के तैनाती पदों पर यथावत रहने के आदेश जारी हुए हैं.














