नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर वियोम शर्मा को बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए उनकी गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। साथ ही याचिकाकर्ता को पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
करोड़ों की डील या 25 लाख की धमकी? हाईकोर्ट में उलझा पूरा विवाद
देहरादून निवासी यूट्यूबर वियोम शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि उनके खिलाफ डालनवाला थाने में दर्ज एफआईआर में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।
याचिका के अनुसार, विपक्षी पक्ष ने वियोम शर्मा से सोशल मीडिया के माध्यम से 25 से 30 करोड़ रुपये की संपत्ति बिकवाने का आग्रह किया था। याचिकाकर्ता का दावा है कि उक्त संपत्ति उनके माध्यम से बिक चुकी है और सौदा पूरा होने पर उन्हें इनाम देने का आश्वासन भी दिया गया था। हालांकि बाद में भुगतान न कर, विपक्षी ने उनके खिलाफ धमकी देकर 25 लाख रुपये की अवैध मांग करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया।
याचिकाकर्ता की दलील
वियोम शर्मा की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्होंने भी इस संबंध में पुलिस को प्रार्थनापत्र दिया था, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत, विपक्षी की शिकायत पर तुरंत एफआईआर दर्ज कर ली गई, जो निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों के खिलाफ है।
विपक्ष का पक्ष
सुनवाई के दौरान विपक्षी पक्ष ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास कर रहा है और पैसों की मांग कर रहा है।
हाईकोर्ट का आदेश
मामले की सुनवाई अवकाशकालीन न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ ने की। कोर्ट ने अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि बिना आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाए किसी की गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए।
कोर्ट ने यूट्यूबर वियोम शर्मा को पुलिस जांच में सहयोग करने के निर्देश देते हुए याचिका का अंतिम रूप से निस्तारण कर दिया है।
अहम बिंदु एक नजर में
- हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक
- बिना कानूनी प्रक्रिया गिरफ्तारी नहीं होगी
- याचिकाकर्ता को जांच में सहयोग के निर्देश
- अरनेश कुमार केस के दिशा-निर्देश लागू
यह फैसला सोशल मीडिया से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया और गिरफ्तारी को लेकर एक अहम नजीर माना जा रहा है।









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