ब्यूरो न्यूज़ उत्तराखंड ब्रॉडकास्ट
आज मुख्यमंत्री पुष्कर धामी हल्द्वानी में हैं,मुख्यमंत्री का शहर में होना मतलब राजनीति और आम जनता दोनो के बीच ही चर्चा होना।
आज मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी पहुंचकर भाजपा पदाधिकारियों एवम कार्यकर्ताओं से मुलाकात की,मुलाकात का कारण भाजपा की अंदरूनी और जनता के बीच की आज की वर्तमान स्तिथि की नब्ज टटोलना माना जा रहा।
लेकिन इस बीच आज विपक्ष ने पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी और पुष्कर सिंह धामी के बीच के अंतर को बताने का प्रयास किया,कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता दीपक बलुटिया घर से निकलें ताकि वह मुख्यमंत्री से हल्द्वानी शहर के दमुवाढूंगा वनभलपुरा जलभराव पेड़ कटान आदि समस्याओं पर प्रदेश के मुखिया पुष्कर सिंह धामी से चर्चा का सकें,ताकि कुछ समाधान निकाल सके और विपक्ष का काम यही होता भी है लेकिन दीपक के घर के बाहर सड़क पर छावनी लग गई,हमेशा की तरह दीपक और उनके साथियों को पुलिस ने यह कहते हुए गिरफ्तार कर लिया कि मुख्यमंत्री का प्रोटोकॉल है।
इस बीच दीपक बलुटिया मुख्यमंत्री एनडी तिवारी की याद दिलाते दिखें,इसके बाद से यह पता चला कि उस दौर की राजनीति और इस दौर की राजनीति में धरती आसमान का अंतर है,यह अंतर सिर्फ राजनीति में नहीं बल्कि राजनेताओं में भी है
पहले के मुख्यमंत्री से आम नागरिक विपक्षी नेता आराम से बैठकर मुलाकात करते थे समस्याओं पर चर्चा करते थे समाधान साथ बैठकर निकाला करते थे लेकिन आज वह बिल्कुल भी संभव नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी एवम अन्य मुख्यसेवकों से तो विपक्ष के नेता आम नागरिक मुलाकात कर लेते थे लेकिन पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात करना आसान नहीं है,अभी विपक्ष समस्याओं पर बैठकर समाधान करने की कोशिश करें भी तो उसका कोई फायदा नहीं,क्योंकि प्रोटोकॉल मुखिया का नागरिक से मिलने की इजाजत नहीं देता,विपक्ष क्या करें पुतला दहन धरना यही राज्य में हमेशा देखने को मिलता रहता है।
यही नहीं आज की एक खबर रामनगर से भी कुछ ऐसी ही सामने आई,रामनगर के महाविद्यालय में बतौर मुख्य अतिथि छात्र सर्वोदय कार्यक्रम में सिरकत करने मुख्यमंत्री धामी पहुंचे लेकिन वहां के छात्र संघ अध्यक्ष का आरोप है कि उन्हें एवं अन्य छात्र संघ पदाधिकारी को इसका आमंत्रण ही नहीं दिया गया फिर भी वह महाविद्यालय की समस्याएं लेकर ज्ञापन देने मुख्यमंत्री के पास गए लेकिन उन्हें मुलाकात नहीं करने दी,वहां भी मुख्यमंत्री का प्रोटोकॉल सामने आ गया।
अब सवाल है महाविद्यालय में कार्यक्रम होने के बाद छात्र संघ इकाई को आमंत्रण ना देना,छात्रों के कार्यक्रम में शहर की बातें करना छात्रों के लिए सजे मंच में तमाम भाजपा पदाधिकारी होना यह कैसा मुख्यमंत्री का प्रोटोकॉल है।
पुष्कर सिंह धामी जी के प्रोटोकॉल के बाद यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि वह उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक के नहीं बल्कि सिर्फ भाजपा कार्यकर्ताओं पर पदाधिकारीयों के मुख्यमंत्री हो।
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