CAG रिपोर्ट विधानसभा में प्रस्तुत क्यों नहीं? सवालों के घेरे में सिस्टम
अधिवक्ता नेगी के अनुसार CAG की यह रिपोर्ट अब तक विधानसभा में पेश ही नहीं की गई है। न चर्चा, न बहस — यानी राज्य की सबसे अहम वित्तीय रिपोर्ट को सार्वजनिक मंच से छिपाने का गंभीर आरोप। नेगी का कहना है कि यह पारदर्शिता और जवाबदेही पर सीधा प्रश्नचिह्न है।
कथित वित्तीय अनियमितताओं के आंकड़े चौंकाने वाले
CAG रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग वित्तीय वर्षों में निम्न अनियमितताएं दर्ज की गईं:
| वित्तीय वर्ष | अनियमितताओं की राशि (₹ करोड़ में) |
|---|---|
| 2016–17 | 92.41 |
| 2017–18 | ऑडिट नहीं हुआ |
| 2018–19 | ऑडिट नहीं हुआ |
| 2019–20 | 656.05 |
| 2020–21 | 829.90 |
| 2021–22 | 43.48 |
| 2022–23 | 96.99 |
| 2023–24 | 803.00 |
| 2024–25 (मई तक) | 38.41 |
| कुल | ₹ 2,660.27 करोड़ |
कोरोनाकाल में भी जारी रहा कथित खेल: 829 करोड़ की अनियमितता का आरोप
शिकायत में कहा गया कि जब पूरा प्रदेश कोविड संकट से जूझ रहा था, तब पेयजल निगम में 829.90 करोड़ रुपये की भारी अनियमितताएं सामने आईं। आरोप है कि कई ठेकेदारों को बिना GST, बिना बैंक गारंटी और बिना गुणवत्ता जांच के ही करोड़ों का भुगतान कर दिया गया।
GST, बैंक गारंटी और निर्माण गुणवत्ता—सभी में बड़े सवाल
CAG के निष्कर्ष के अनुसार:
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कई ठेकेदारों ने GST जमा नहीं किया, फिर भी भुगतान जारी रहा।
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बैंक गारंटी के बिना करोड़ों रुपये जारी किए गए।
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घटिया गुणवत्ता के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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ठेकेदारों से ब्याज व रॉयल्टी तक नहीं ली गई।
नेगी का दावा है कि यह सब विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं।
SIT या CBI जांच की मांग तेज
मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में कहा गया है कि यह सिर्फ वित्तीय लापरवाही नहीं, बल्कि राज्य के संसाधनों को नुकसान पहुँचाने की एक योजनाबद्ध साजिश है। इसलिए मामले की SIT या CBI जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों–कर्मचारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।










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