देहरादून, । उत्तराखंड में ग्रामीण विकास योजनाओं की प्रगति और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से Civil Services Institute, देहरादून में ग्राम्य विकास सचिव धीराज गर्ब्याल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के सभी जनपदों के मुख्य विकास अधिकारियों (CDO) ने प्रतिभाग किया।
बैठक में ग्रामीण विकास से जुड़ी प्रमुख योजनाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए भविष्य की कार्ययोजना पर मंथन किया गया। सचिव गर्ब्याल ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जनपद पलायन रोकने तथा युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ठोस एवं व्यावहारिक रणनीति तैयार करे।
प्रमुख योजनाओं की समीक्षा
बैठक में निम्न योजनाओं की प्रगति पर विशेष चर्चा की गई—
- एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन)
- महात्मा गांधी नरेगा
- दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (DDU-GKY)
- ग्रामीण अवस्थापना विकास योजनाएं
- मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम
- मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना
- प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)
- मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना
- वाइब्रेंट ग्राम योजना – मॉडल
सचिव गर्ब्याल ने श्रम, कौशल विकास और आजीविका संवर्धन से जुड़ी गतिविधियों पर विशेष फोकस करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं की शत-प्रतिशत लक्ष्यपूर्ति सुनिश्चित की जाए और जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग को मजबूत बनाया जाए।
युवाओं के कौशल विकास पर जोर
बैठक में आरसेटी (RSETI) और डीडीयू-जीकेवाई के माध्यम से युवाओं को कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने के निर्देश दिए गए। सभी मुख्य विकास अधिकारियों को अपने-अपने जनपदों में इच्छुक युवाओं की पहचान कर स्किल गैप एनालिसिस कराने और राज्य के भीतर उद्योगों में रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास तेज करने को कहा गया।
सचिव ने स्पष्ट किया कि पलायन रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित करना है।
स्वयं सहायता समूहों और ग्रोथ सेंटरों को सशक्त बनाने पर बल
राज्य के ग्रोथ सेंटरों को स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से पुनर्स्थापित और सशक्त करने पर भी बल दिया गया, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
विशेष रूप से House of Himalayas ब्रांड के तहत सामुदायिक संगठनों द्वारा तैयार प्रीमियम उत्पादों के विपणन पर चर्चा की गई। सचिव ने बताया कि इस ब्रांड का उद्देश्य महिलाओं और किसान उत्पादक समूहों की आय में वृद्धि करना तथा उत्पादों की गुणवत्ता और पैकेजिंग को बेहतर बनाना है।
साथ ही, समूहों के कृषि आधारित उत्पादों के विपणन के लिए एनओपी (National Organic Program) और एनपीओपी (National Programme for Organic Production) प्रमाणन प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।
25 मार्च तक वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश
मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना और मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम की समीक्षा के बाद सभी जनपदों को निर्देशित किया गया कि 25 मार्च 2026 तक वार्षिक कार्ययोजनाएं तैयार कर राज्य स्तर पर स्वीकृति हेतु भेजी जाएं।
विकास खंड स्तर पर लाभार्थियों की वार्षिक सूची तैयार करने पर भी जोर दिया गया, ताकि योजनाओं का पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
बैठक में उपस्थित अधिकारी
बैठक में अपर सचिव एवं आयुक्त ग्राम्य विकास श्रीमती अनुराधा पाल, अपर सचिव सुश्री झरना कमठान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने विभिन्न जनपदों की बेस्ट प्रैक्टिस और सफलता की कहानियां भी साझा कीं।
उत्तराखंड सरकार द्वारा ग्रामीण विकास योजनाओं की सतत समीक्षा से स्पष्ट है कि राज्य में पलायन रोकने, युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यदि जनपद स्तर पर प्रभावी रणनीति लागू की जाती है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।












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