उत्तरकाशी — राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला उत्तरकाशी से सामने आया है, जहां गरीब और अंत्योदय कार्डधारकों को बांटे जाने वाले 9148 किलो आयोडीन युक्त नमक की खेप सरकारी गोदाम पहुंचने के बजाय महीनों तक ‘लापता’ रही। हैरानी की बात यह है कि डिलीवरी रसीद पर गोदाम प्रभारी के हस्ताक्षर और मुहर मौजूद थीं, लेकिन गोदाम में नमक का अता-पता नहीं था।
मीडिया की पड़ताल और जनशिकायतों से हुआ खुलासा
जनवरी 2025 में गुजरात की एक प्राइवेट कंपनी मेसर्स डायनेमिक ट्रेडलिंक द्वारा यह नमक नेताला के सरकारी गोदाम भेजा गया था। लेकिन जब मई तक इसका कोई वितरण नहीं हुआ तो स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए। मीडिया की रिपोर्टिंग के बाद खाद्य आयुक्त चंद्रेश कुमार ने तत्काल जांच के आदेश दिए और जिला पूर्ति अधिकारी आशीष कुमार को तीन दिन में रिपोर्ट पेश करने को कहा।
सरकारी गोदाम का इन्कार, डिलीवरी रसीद पर फिर भी हस्ताक्षर!
पूर्ति निरीक्षक मालचंद भंडारी का दावा है कि जनवरी से अप्रैल तक कोई नमक नहीं आया। केवल मई में 90 क्विंटल नमक प्राप्त हुआ जिसे तुरंत वितरित कर दिया गया। बावजूद इसके, जनवरी की डिलीवरी रसीद पर उनके हस्ताक्षर और सरकारी मुहर दर्ज हैं।
25 क्विंटल नमक निजी गोदाम में मिला, भेजा जा रहा था गोशाला
इसी बीच जांच में बड़ा खुलासा यह हुआ कि विकासनगर के एक प्राइवेट गोदाम में मार्च से 25 क्विंटल नमक स्टोर किया गया था। जब उसे एक ट्रक में लादकर गोशाला भेजा जा रहा था, तो पुलिस ने ट्रक और नमक जब्त कर लिया। अब यह खेप भी जांच के दायरे में आ गई है।
एफआईआर दर्ज, ठेकेदार पर गंभीर आरोप
पूर्ति निरीक्षक राखी ने नमक सप्लाई से जुड़े ठेकेदार तनिष्क गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर सरकारी सप्लाई का नमक निजी गोदाम में छिपाया और उसे खपाने की कोशिश की। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए गोदाम को सील कर दिया और आरोपी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
आपूर्ति व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल
यह मामला सिर्फ नमक चोरी का नहीं, बल्कि एक व्यापक भ्रष्टाचार की आशंका को उजागर करता है। जांच में अब तक जो सवाल खड़े हुए हैं:
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क्या डिलीवरी रसीद पर किए गए हस्ताक्षर फर्जी हैं?
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यदि नमक जनवरी में भेजा गया तो चार महीने तक वह कहां था?
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क्या विभागीय मिलीभगत से नमक निजी गोदाम में रखा गया?
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इस दौरान गरीबों को वितरण में क्या दिया गया?
कमिश्नर ने दिए व्यापक जांच के निर्देश
खाद्य आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि यह जांच केवल लापता नमक तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जनवरी से जून 2025 तक की पूरी आपूर्ति प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
निष्कर्ष: गरीबों के हिस्से का राशन बन गया भ्रष्टाचार का शिकार
यह घोटाला महज़ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के अधिकारों पर खुला हमला है। जब खाद्य सुरक्षा के नाम पर सरकार करोड़ों खर्च कर रही हो, तो इस तरह की घटनाएं पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती हैं। समय है कि जांच पारदर्शी हो और दोषियों को सख्त सजा मिले, ताकि भविष्य में कोई भी गरीबों के हक को बेचने की हिम्मत न कर सके।












