विधायक तिलक राज बेहड़ ने स्पष्ट कहा कि गैरसैंण (Gairsain) अब स्थायी राजधानी (Permanent Capital) नहीं बन सकती, क्योंकि उसे पहले ही ग्रीष्मकालीन राजधानी (Summer Capital) घोषित किया जा चुका है। उनके मुताबिक, अब राजधानी देहरादून में ही रहनी चाहिए।
Behar’s Remark Sparks Political Debate
कांग्रेस विधायक के इस बयान से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। खास बात यह है कि बेहड़ का यह बयान उस समय आया जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Harish Rawat) पहले ही कह चुके हैं कि अगर 2027 में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो गैरसैंण को स्थायी राजधानी (Permanent Capital) घोषित किया जाएगा।
ऐसे में तिलक राज बेहड़ का यह बयान पार्टी के भीतर मतभेद की ओर इशारा करता है।
Leader of Opposition Clarifies Party’s Stand
इस पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य (Yashpal Arya) ने सफाई देते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर किसी एक व्यक्ति का बयान पार्टी की नीति नहीं होता। पार्टी सामूहिक रूप से इस विषय पर निर्णय लेती है। उन्होंने कहा कि गैरसैंण में बुनियादी ढांचे (Infrastructure Development) को लेकर कांग्रेस सरकार ने हमेशा गंभीरता से काम किया है।
BJP Counters Congress, Calls It Double Standards
वहीं, इस मुद्दे पर भाजपा विधायक विनोद चमोली (Vinod Chamoli) ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “या तो तिलक राज बेहड़ हरीश रावत को अपना नेता नहीं मानते या फिर हरीश रावत कांग्रेस में अपनी मर्जी से बयान देते रहते हैं।”
चमोली ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ गैरसैंण के नाम पर राजनीति (Political Drama) करना जानती है। उन्होंने सवाल उठाया — “जब कांग्रेस के पास 10 साल सत्ता थी, तब उसने राजधानी घोषित क्यों नहीं की? अब चुनाव से पहले बयानबाजी क्यों?”
Gairsain Capital Debate: Political Symbolism or Real Possibility?
राज्य गठन के बाद से ही गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग लगातार उठती रही है। कई लोग मानते हैं कि पहाड़ी राज्य की राजधानी पहाड़ों में होनी चाहिए ताकि विकास संतुलित रूप से हो सके। लेकिन दूसरी ओर, देहरादून पहले से ही प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्र (Administrative & Political Hub) बन चुका है, जिससे स्थायी राजधानी के लिए गैरसैंण को चुनना चुनौतीपूर्ण है।
Conclusion
गैरसैंण पर जारी सियासी जंग (Political Controversy) ने एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस के भीतर असहमति और भाजपा की कड़ी प्रतिक्रिया ने आने वाले चुनावों से पहले राजधानी के मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया है।










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