शक्तिफार्म क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक निजी विद्यालय में पढ़ने वाले कक्षा दसवीं के छात्र ने कथित मानसिक प्रताड़ना से आहत होकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और संवेदनशीलता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, शक्तिगढ़ के शिव मंदिर वार्ड निवासी संयासी साना मूल रूप से हस्तिनापुर (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं। वे बीते दस वर्षों से शक्तिफार्म में किराए के मकान में रहकर बाजार में जूस की दुकान चला रहे हैं। उनका 16 वर्षीय बेटा नितिन साना क्षेत्र के एक निजी विद्यालय में कक्षा दसवीं का छात्र था।
परिजनों का आरोप है कि मंगलवार को विद्यालय में आयोजित मासिक परीक्षा के दौरान नितिन को नकल करते हुए पकड़ा गया। इसके बाद प्रधानाचार्य सहित अन्य शिक्षकों ने उसे न केवल डांटा, बल्कि मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया। यहीं बात खत्म नहीं हुई। विद्यालय प्रबंधन ने छात्र के अभिभावकों को भी स्कूल बुलाया।
नितिन की मां जब विद्यालय पहुँचीं, तो आरोप है कि वहाँ भी उन्हें शिक्षकों द्वारा अपमानित किया गया। बच्चे की गलती के लिए उन्हें सभी के सामने खरी-खोटी सुनाई गई और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को मजबूर किया गया। इस घटनाक्रम के बाद नितिन पूरी तरह टूट गया।
विद्यालय से लौटने के बाद नितिन गुमसुम हो गया। उसने खुद को कमरे में बंद कर लिया, न किसी से बातचीत की और न ही भोजन किया। शाम के समय जब उसकी छोटी बहन जिया दुकान से घर पहुँची, तो कमरे में नितिन का शव फर्श पर पड़ा मिला।
परिजनों ने तत्काल उसे चिकित्सक के पास पहुँचाया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। गहरे सदमे में डूबे परिवार ने पुलिस कार्रवाई किए बिना ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह सवाल भी छोड़ जाती है कि क्या अनुशासन के नाम पर छात्रों को मानसिक रूप से तोड़ देना सही है? विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य सुधार होना चाहिए, न कि ऐसा दबाव, जो किसी मासूम की जान ले ले।










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