देहरादून।
प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती एक बार फिर कानूनी दांव-पेंच में फंस गई है। राज्य में 1670 पदों पर चल रही प्राथमिक शिक्षक भर्ती का मामला अब सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। प्रशिक्षित अभ्यर्थियों द्वारा दाखिल याचिका के बाद भर्ती प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
61861 अभ्यर्थियों ने किया है आवेदन
सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए प्रदेशभर से कुल 61,861 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। मौजूदा नियमों के अनुसार इस भर्ती में बीएड अभ्यर्थियों को पात्र नहीं माना गया है, लेकिन बीएड के बाद छह माह का ब्रिज कोर्स कर चुके प्रशिक्षित अभ्यर्थियों ने खुद को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने की मांग उठाई है।
ब्रिज कोर्स अभ्यर्थियों की सुप्रीम कोर्ट में याचिका
ममता पाल एवं अन्य अभ्यर्थियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि उन्हें द्विवर्षीय डीएलएड के समकक्ष मानते हुए प्राथमिक शिक्षक भर्ती में शामिल किया जाना चाहिए। इससे पहले ये अभ्यर्थी हाईकोर्ट भी गए थे, लेकिन वहां से याचिका खारिज होने के बाद अब सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया है।
विभाग के सामने असमंजस की स्थिति
शिक्षा विभाग इस पूरे मामले में असमंजस की स्थिति में नजर आ रहा है। एक ओर, राज्य में विभिन्न स्कूलों में कार्यरत अप्रशिक्षित शिक्षकों को एनआईओएस से डीएलएड प्रशिक्षण के बाद कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने के लिए वैध माना गया है। वहीं दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट के 11 अगस्त 2023 के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बीएड अभ्यर्थी प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए पात्र नहीं होंगे।
डीएलएड अभ्यर्थी चाहते हैं शीघ्र भर्ती
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) से डीएलएड कर चुके अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में जितनी देरी होगी, मामला उतना ही अधिक कानूनी उलझनों में फंसता चला जाएगा। उनका आग्रह है कि 1670 पदों पर भर्ती प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
12 जनवरी को सभी जिलों में एकसाथ काउंसलिंग
प्राथमिक शिक्षक भर्ती के तहत 12 जनवरी को प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ काउंसलिंग आयोजित की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि किसी अभ्यर्थी का एक से अधिक जिलों में चयन न हो सके।
शिक्षा निदेशालय ने शासन को लिखा पत्र
मामले के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद शिक्षा निदेशालय ने शासन को पत्र भेजते हुए अनुरोध किया है कि इस प्रकरण की प्रभावी पैरवी के लिए एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड को नामित किया जाए, ताकि राज्य का पक्ष मजबूती से रखा जा सके।










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