देहरादून, एक बेहद दुखद और समाज को झकझोर देने वाली घटना में देहरादून की विशेष पॉक्सो अदालत ने भारतीय वायुसेना के एक कर्मी को अपनी बेटी के साथ लगभग 12 वर्षों तक दुष्कर्म और यौन शोषण के दोषी करार देते हुए 20 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने इस जघन्य अपराध को “समाज के लिए घोर कलंक” बताते हुए सख्त टिप्पणी की कि जिस पिता की जिम्मेदारी बच्ची की रक्षा करना थी, उसी ने उसके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को पूरी तरह तबाह कर दिया।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अर्चना सागर की अदालत ने दोषी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही पीड़िता को तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।
पीड़िता ने अदालत में बताया कि जब वह महज 5-6 साल की थी, तब से उसके पिता ने यौन शोषण शुरू कर दिया था। यह सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक वह 17 साल की नहीं हो गई। आरोपी उसे चुप रखने के लिए उसकी गुड़िया के हाथ-पैर तोड़ देता था और धमकी देता था कि अगर किसी को बताया तो उसके साथ भी यही होगा।
दोषी ने बेटी को गुमराह करने के लिए घिनौनी बात कही थी कि “हर पिता अपनी बेटी से ऐसे ही प्यार करता है”। वर्षों तक सहन करने के बाद नवंबर 2023 में पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर अपनी मां को सारी सच्चाई बता दी। 20 नवंबर को जब आरोपी ने फिर से गलत हरकत की, तो मां ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। गिरफ्तारी के डर से आरोपी भाग गया था, लेकिन बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
अदालत ने स्पष्ट कहा कि ऐसे विकृत और क्रूर अपराध में किसी भी प्रकार की नरमी बरतना उचित नहीं है। यह फैसला बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को मजबूती प्रदान करता है।
पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी गई है, जैसा कि पॉक्सो कानून के तहत अनिवार्य है। ऐसे मामलों में पीड़िताओं को तत्काल मनोवैज्ञानिक सहायता और काउंसलिंग की आवश्यकता होती है। यदि आप या कोई जानकार इस तरह की स्थिति में है, तो तुरंत पुलिस या हेल्पलाइन (1098 या 181) से संपर्क करें।










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