उत्तराखंड के नैनीताल में बढ़ती गर्मी के बीच वन विभाग ने जंगली पशु-पक्षियों को राहत देने के लिए विशेष पहल शुरू की है। वन विभाग द्वारा जंगलों में छोटे-छोटे जलकुंड बनाकर उनमें नियमित रूप से पानी भरा जा रहा है, ताकि गर्मियों में वन्यजीवों और पक्षियों को प्यास से परेशान न होना पड़े।
नैनीताल से कालाढूंगी मार्ग स्थित बॉटनिकल गार्डन के आसपास घना वन क्षेत्र है। यहां वन विभाग द्वारा कई नए जलकुंड बनाए गए हैं, साथ ही पुराने जलकुंडों की सफाई कर उन्हें फिर से उपयोग में लाया जा रहा है। इसका उद्देश्य गर्मी के मौसम में वन्यजीवों और पक्षियों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना है।
बॉटनिकल गार्डन के वनरक्षक अरविंद कुमार ने बताया कि गर्मियों में जंगलों में रहने वाले जानवरों और पक्षियों को पानी की अधिक आवश्यकता होती है। इसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। बॉटनिकल गार्डन और आसपास के घने जंगलों में बनाए गए जलकुंडों में हर 2 से 3 दिनों के अंतराल पर पानी भरा जाता है, ताकि वन्यजीवों को पानी की कमी न हो।
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में कई प्रवासी पक्षी भी गर्मियों में पहुंचते हैं, जिससे यह स्थान पक्षी प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए बेहद आकर्षक बन जाता है। यहां स्थानीय चीर फीजेंट, कलिज फीजेंट के अलावा किंगफिशर और ड्रंगो जैसी कई प्रजातियों के पक्षी भी देखने को मिलते हैं।
वन विभाग की यह पहल ठीक उसी तरह की जा रही है, जैसे कॉर्बेट नेशनल पार्क में वन्यजीवों के लिए वाटर होल बनाए जाते हैं। इन वाटर होलों में समय-समय पर पानी भरा जाता है, जहां अक्सर बाघ, तेंदुआ, हाथी और हिरन जैसे वन्यजीव पानी पीते या स्नान करते नजर आते हैं।
वन विभाग को उम्मीद है कि पहाड़ों में लगातार बढ़ते तापमान के बीच बनाए गए ये जलकुंड जंगलों में रहने वाले पशु-पक्षियों को गर्मी और प्यास से राहत देने में मददगार साबित होंगे।












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