India की अर्थव्यवस्था को लेकर आई एक नई रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2030 तक Germany को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। हालांकि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को उत्पादन, रोजगार और नई तकनीकों पर तेजी से काम करना होगा।
जापान को भी पीछे छोड़ने की तैयारी
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत जल्द ही Japan को पीछे छोड़कर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। लेकिन इसके साथ कई चुनौतियां भी सामने हैं, जिन्हें समय रहते सुलझाना जरूरी है, वरना आर्थिक रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
उत्पादन क्षेत्र में गिरावट बनी चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दशक में भारत की जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 17% से घटकर 13% रह गई है। यह चिंता का विषय है क्योंकि उत्पादन क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक मैन्युफैक्चरिंग नौकरी से दो से अधिक अतिरिक्त नौकरियां बनती हैं, जबकि सर्विस सेक्टर में यह प्रभाव कम होता है।
इन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा अवसर
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को उन क्षेत्रों पर फोकस करना चाहिए जहां रोजगार के अवसर ज्यादा हों और ऑटोमेशन का खतरा कम हो। इनमें शामिल हैं:
- प्रिसिजन इक्विपमेंट
- स्पेशलिटी केमिकल्स
- फार्मा इंटरमीडिएट
- इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली
- टेक्सटाइल
इन सेक्टर्स में कम लागत पर तेजी से विस्तार संभव है, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
कृषि क्षेत्र में आय की बड़ी समस्या
रिपोर्ट में कृषि क्षेत्र की खामियों पर भी ध्यान दिलाया गया है। किसानों को उनकी उपज की कीमत का केवल 25% हिस्सा ही मिल पाता है, जबकि बाकी सप्लाई चेन में चला जाता है।
यदि इस व्यवस्था में सुधार किया जाए, तो ग्रामीण आय और अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिल सकती है।
AI और शहरी विकास की अहम भूमिका
रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में Artificial Intelligence (AI) अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाएगा। कंपनियों को इसे केवल प्रयोग तक सीमित रखने के बजाय अपने कार्यों में शामिल करना होगा।
साथ ही, भारत को अपने शहरों को बेहतर बनाना होगा। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, सस्ती हाउसिंग और मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट ही देश को हाई-इनकम इकोनॉमी बनने में मदद करेंगे।
भारत के पास दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का मजबूत अवसर है, लेकिन इसके लिए उत्पादन, रोजगार, कृषि सुधार और तकनीकी विकास पर संतुलित ध्यान देना बेहद जरूरी होगा।













