देहरादून: राजपुर स्थित प्राचीन सिद्धपीठ माँ अम्बिका देवी मंदिर में नवरात्र के पावन अवसर पर आयोजित भव्य जागर संध्या ने पूरी घाटी को भक्तिमय बना दिया। गुरुवार रात हुए इस धार्मिक आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और माँ भगवती की भक्ति में लीन होकर रातभर भजन, जागर और नृत्य का आनंद लिया।
मंगलेश डंगवाल के जागर ने बांधा समां
लोकगायक मंगलेश डंगवाल ने ढोल-दमाऊं की पारंपरिक थाप के साथ भक्ति संध्या की शुरुआत की। माँ गंगा की स्तुति से शुरू हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने उत्तराखंड की प्रसिद्ध नंदा राजजात यात्रा और माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों पर आधारित जागर प्रस्तुत किए, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
ढोल-दमाऊं की गूंज और देवी स्तुति के बीच श्रद्धालु झूम उठे और पूरी रात भक्ति का माहौल बना रहा।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि मंत्री गणेश जोशी, कैबिनेट मंत्री खजान दास, राज्यमंत्री प्रताप पंवार और भाजपा युवा मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नेहा जोशी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने दी रामनवमी की शुभकामनाएं
इस अवसर पर श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने प्रदेशवासियों और देशवासियों को रामनवमी की हार्दिक बधाई देते हुए सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की कामना की।
मंत्रियों ने कही ये बातें
गणेश जोशी ने कहा:
“नवरात्र आत्मशुद्धि और शक्ति आराधना का पर्व है। माँ अम्बिका सभी भक्तों को सुख और शक्ति प्रदान करें।”
खजान दास ने कहा:
“जागर हमारी आस्था और संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है।”
प्रताप पंवार ने कहा:
“नवरात्र में देवी के स्वरूपों का स्मरण हमें साहस और सकारात्मक ऊर्जा देता है।”
जागर:
आस्था और लोकसंस्कृति का संगम
उत्तराखंड की लोकसंस्कृति में जागर केवल संगीत नहीं, बल्कि देवी-देवताओं के आवाहन का एक आध्यात्मिक माध्यम है। इस परंपरा के जरिए श्रद्धालु देवी शक्ति से जुड़कर दिव्य अनुभूति प्राप्त करते हैं।
भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
कार्यक्रम के दौरान जागरण के साथ-साथ विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य अर्जित किया।













