देहरादून स्थित Shri Guru Ram Rai University (एसजीआरआरयू) में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों, शोधार्थियों और योग साधकों ने सक्रिय भागीदारी की।
“Yoga and Ayurvedic Perspective of Nutrition for Lifestyle Disorders” विषय पर आधारित इस सम्मेलन का उद्देश्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के समाधान में योग और आयुर्वेद की भूमिका को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना रहा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग की बढ़ती लोकप्रियता पर चर्चा
सम्मेलन के दौरान अमेरिका, जर्मनी, दुबई, वियतनाम और अफ्रीका से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। जर्मनी की योग प्रैक्टिश्नर लिया गोर्डेल ने भारतीय योग परंपरा की सराहना की।
विशेषज्ञों ने बताया कि आज योग और आयुर्वेद वैश्विक स्वास्थ्य के प्रभावी साधन बन चुके हैं और उनकी स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है।
योग और आयुर्वेद से लाइफस्टाइल डिसऑर्डर्स पर नियंत्रण संभव
सम्मेलन के मुख्य आयोजक एवं डीन प्रो. डॉ. ओम नारायण तिवारी ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के कारण बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इनसे बचाव के लिए योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है।
मुख्य वक्ता Dr. Ramakant Pandey ने योग को शरीर, मन और आत्मा के समन्वय की समग्र विधा बताया।
वहीं आयुर्वेद विशेषज्ञ Dr. Dhananjay Kumar Srivastava ने संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और अनुशासित दिनचर्या को स्वस्थ जीवन का आधार बताया।
तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत हुए शोध पत्र
दूसरे दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों ने योग चिकित्सा, आयुर्वेदिक पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और जीवनशैली रोगों की रोकथाम पर शोध पत्र प्रस्तुत किए।
विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक और प्रमाण आधारित अध्ययन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
प्रमुख हस्तियों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान
- Dr. Ramesh Lal Bijlani
- Dr. Aarti Pal
को सम्मानित किया गया।
विश्वविद्यालय प्रशासन का सहयोग
कार्यक्रम को Uttarakhand State Council for Science and Technology (यूकॉस्ट) के सहयोग से आयोजित किया गया।
विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट Mahant Devendra Das ने आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए ऐसे आयोजनों को समय की आवश्यकता बताया।
यह अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलन न केवल योग और भारतीय संस्कृति के वैश्विक महत्व को उजागर करने में सफल रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान के आदान-प्रदान का सशक्त मंच भी साबित हुआ।













