प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार अब बड़ा कदम उठाने जा रही है। शिक्षकों की लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को गति देने के लिए सरकार जल्द ही अध्यादेश लाने की तैयारी में है। कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा के बाद सहमति बन चुकी है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के स्कूलों में प्रधानाचार्यों के कुल 1385 पदों में से करीब 1250 पद खाली हैं, जो लगभग 90 प्रतिशत है। वहीं प्रधानाध्यापकों के 910 में से 870 पद रिक्त पड़े हैं। इसके अलावा प्रवक्ताओं के चार हजार से अधिक पद भी पदोन्नति के अभाव में खाली हैं। प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों में भी यही स्थिति बनी हुई है।
इन भारी रिक्तियों का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार सेवा नियमावली में संशोधन कर अध्यादेश लाने की योजना बना रही है।
शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार शिक्षक और छात्र हित में हर जरूरी कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पदोन्नति से जुड़े मामले कोर्ट में लंबित होने के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है, जिसे अध्यादेश के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।
शिक्षकों में नाराजगी
पदोन्नति नहीं होने से शिक्षकों में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। कई शिक्षक 30 से 32 वर्षों की सेवा पूरी करने के बाद भी बिना प्रमोशन के ही रिटायर हो रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि सरकार कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रखते हुए अंतरिम रूप से पदोन्नति दे सकती है, जिससे उनकी वर्षों पुरानी मांग पूरी हो सके।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का मानना है कि अध्यादेश के जरिए लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद को खत्म किया जा सकेगा और शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इससे न केवल शिक्षकों को उनका अधिकार मिलेगा, बल्कि स्कूलों में खाली पड़े पद भी जल्द भरे जा सकेंगे।













