Uttarakhand broadcast : बदलती जीवनशैली, कम पानी पीने की आदत, फास्ट फूड और लगातार बढ़ते तनाव के कारण किडनी स्टोन (पथरी) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार आज युवाओं से लेकर मध्यम आयु वर्ग तक बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी से प्रभावित हो रहे हैं। समय रहते इलाज न मिलने पर यह समस्या गंभीर दर्द, संक्रमण और किडनी संबंधी जटिलताओं का कारण बन सकती है।
हाल ही में राजधानी दिल्ली के एक 38 वर्षीय निजी कंपनी कर्मचारी को अचानक कमर और पेट में असहनीय दर्द की शिकायत हुई। दर्द के साथ उल्टी और पेशाब में खून आने जैसे लक्षण दिखाई देने पर परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे। जांच और अल्ट्रासाउंड में किडनी में लगभग 8mm की पथरी पाई गई।
डॉक्टरों ने शुरुआती उपचार के तौर पर दर्द कम करने की दवा, अधिक पानी पीने और खानपान में बदलाव की सलाह दी। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि पथरी प्राकृतिक रूप से बाहर नहीं निकलती है, तो लिथोट्रिप्सी या सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। लगातार दर्द और मानसिक तनाव के कारण मरीज और परिवार दोनों चिंतित थे।
क्या है किडनी स्टोन?
विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में कैल्शियम, यूरिक एसिड और अन्य खनिजों के जमा होने से किडनी में छोटे-छोटे क्रिस्टल बनने लगते हैं, जो बाद में पथरी का रूप ले लेते हैं। यह समस्या अक्सर कम पानी पीने, ज्यादा नमक और प्रोटीन युक्त भोजन, मोटापा और अनियमित दिनचर्या के कारण बढ़ती है।
किडनी स्टोन के प्रमुख लक्षण:
- कमर या पेट में तेज दर्द
- पेशाब में जलन या बार-बार पेशाब आना
- उल्टी और बेचैनी
- पेशाब में खून आना
- गंभीर स्थिति में बुखार और संक्रमण
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने पर पथरी का आकार बढ़ सकता है, जिससे किडनी को नुकसान पहुंचने का खतरा भी रहता है।
आयुर्वेदिक उपचार की ओर बढ़ रहा भरोसा
स्वास्थ्य क्षेत्र में इन दिनों कई लोग आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उपचार विकल्पों की ओर भी रुख कर रहे हैं। इसी क्रम में “Urogen” नामक आयुर्वेदिक दवा की चर्चा मरीजों के बीच बढ़ रही है। दावा किया जा रहा है कि यह दवा प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से तैयार की गई है और पथरी को धीरे-धीरे बाहर निकालने में मदद कर सकती है।
जानकारी के अनुसार इसमें शिलाजीत, पाषाणभेद, गोक्षुरा, पुनर्नवा, वरूण, यष्टिमधु और अन्य आयुर्वेदिक तत्वों का उपयोग किया गया है। आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि ये जड़ी-बूटियां मूत्र मार्ग को साफ रखने और शरीर में जमा तत्वों को बाहर निकालने में सहायक हो सकती हैं।
बताया गया कि दवा के साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, नमक और तला-भुना भोजन कम करना तथा नियमित वॉक जैसी जीवनशैली अपनाने पर मरीज को कुछ दिनों में राहत महसूस हुई। बाद की जांच में पथरी का आकार कम पाया गया और कुछ सप्ताह बाद रिपोर्ट सामान्य आने की जानकारी सामने आई।
विशेषज्ञों की सलाह
डॉक्टरों का कहना है कि किडनी स्टोन का इलाज मरीज की स्थिति और पथरी के आकार पर निर्भर करता है। छोटी पथरी कई बार दवा और खानपान में बदलाव से निकल सकती है, जबकि बड़ी पथरी के लिए चिकित्सकीय प्रक्रिया जरूरी हो सकती है। किसी भी प्रकार की दवा या उपचार शुरू करने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार रोजाना पर्याप्त पानी पीना, संतुलित भोजन करना, ज्यादा नमक और जंक फूड से बचना तथा नियमित स्वास्थ्य जांच करवाना किडनी स्टोन जैसी समस्याओं से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।












