देहरादून: उत्तराखंड में बढ़ती वरिष्ठ नागरिक आबादी और बदलती सामाजिक परिस्थितियों के बीच केयर इकॉनॉमी (Care Economy) को मजबूत बनाने की दिशा में बुधवार को देहरादून में पहली विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार और समाज कल्याण विभाग, उत्तराखंड के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यशाला में देखभाल सेवाओं को व्यवस्थित रूप से विकसित करने और उन्हें रोजगार तथा अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा हुई।
क्या है केयर इकॉनॉमी?
केयर इकॉनॉमी के अंतर्गत लोगों की देखभाल, स्वास्थ्य, शिक्षा और दैनिक जीवन से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने वाली आर्थिक गतिविधियां और सेवाएं शामिल होती हैं। इसमें बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, बीमार व्यक्तियों और दिव्यांगजनों की देखभाल के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाएं, घरेलू कार्य, बाल देखभाल और अन्य देखभाल संबंधी सेवाएं शामिल हैं।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड में इन सेवाओं को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर बनाना तथा इनके माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना रहा।
बदलते परिवारों के कारण बढ़ रही प्रोफेशनल केयर की जरूरत
कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने कहा कि उत्तराखंड में परंपरागत रूप से वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों की देखभाल परिवार के सदस्य ही करते आए हैं। हालांकि, बदलती सामाजिक परिस्थितियों में Professional Care Services की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि एकल परिवारों की बढ़ती संख्या और महिला एवं पुरुष दोनों के नौकरीपेशा होने के कारण परिवारों में पेशेवर देखभाल सेवाओं की मांग बढ़ रही है। ऐसे में केयर इकॉनॉमी युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।
पहाड़ों में अकेले रह रहे बुजुर्गों के लिए जरूरी व्यवस्था
समाज कल्याण मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में युवाओं के पलायन के कारण पर्वतीय क्षेत्रों के कई गांवों में वरिष्ठ नागरिक अपेक्षाकृत अकेले रह रहे हैं। ऐसे बुजुर्गों की सामाजिक, भावनात्मक और दैनिक जरूरतों की देखभाल के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। केयर इकॉनॉमी को मजबूत करने के लिए सरकार, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), विशेषज्ञों और सिविल सोसाइटी को मिलकर काम करना होगा।
2050 तक हर पांच में से एक व्यक्ति होगा 60 वर्ष से अधिक
कार्यशाला में वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती संख्या को लेकर भी महत्वपूर्ण आंकड़े सामने रखे गए। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या 10.38 करोड़ थी, जो उस समय देश की कुल आबादी का लगभग 8.6 प्रतिशत थी।
अनुमान के अनुसार वर्ष 2050 तक देश में प्रत्येक पांच में से एक व्यक्ति 60 वर्ष से अधिक आयु का हो सकता है। इस दौरान वरिष्ठ नागरिकों की संख्या लगभग 35 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
ऐसे में आने वाले वर्षों में गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और व्यवस्थित Elderly Care Services की आवश्यकता और अधिक बढ़ने की संभावना है।
कई विभागों और संस्थाओं ने लिया हिस्सा
कार्यशाला में स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, ग्राम्य विकास और वित्त विभाग के अधिकारियों के साथ विषय विशेषज्ञों, वरिष्ठ नागरिकों तथा दिव्यांगजन कल्याण के क्षेत्र में कार्य कर रहे संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
लतिका रॉय फाउंडेशन और हैप्पी फैमिली हेल्थ केयर एंड रिसर्च एसोसिएशन सहित विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों की ओर से केयर इकॉनॉमी से जुड़े विषयों पर प्रस्तुतियां दी गईं।
ये अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी, निदेशक समाज कल्याण संजय कुमार, अपर सचिव सुंदलाल सेमवाल, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया, अपर सचिव मनमोहन मैनाली, संयुक्त निदेशक गीताराम नौटियाल, मुख्य वित्त नियंत्रक पूजा नेगी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
रोजगार का नया क्षेत्र बन सकती है Care Economy
कार्यशाला से यह बात सामने आई कि उत्तराखंड जैसे राज्य में बढ़ती बुजुर्ग आबादी, युवाओं का पलायन और बदलती पारिवारिक संरचना के बीच Care Economy आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
यदि देखभाल सेवाओं को प्रशिक्षण, कौशल विकास और रोजगार से जोड़ा जाता है तो इससे एक ओर वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को बेहतर देखभाल मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।











