Dehradun News: देहरादून के दून अस्पताल में जनऔषधि केंद्र पर मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि ऑर्थो विभाग में तैनात एक डॉक्टर ने जनऔषधि केंद्र की महिला फार्मासिस्ट को मरीजों को कैल्शियम और पोषण से संबंधित दवाएं केंद्र से नहीं देने की हिदायत दी। फार्मासिस्ट द्वारा इसका कारण पूछे जाने पर डॉक्टर की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिए जाने की बात सामने आई है।
मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने जांच शुरू करने की बात कही है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि यदि कोई डॉक्टर इस तरह से मरीजों को जनऔषधि केंद्र की दवाएं लेने से रोक रहा है तो यह गलत है और मामले की जांच कराई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, दून अस्पताल के ऑर्थो विभाग में तैनात एक डॉक्टर और जनऔषधि केंद्र की महिला फार्मासिस्ट के बीच दवाओं को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि डॉक्टर ने फार्मासिस्ट से कहा कि मरीजों को कैल्शियम और पोषण से संबंधित दवाएं जनऔषधि केंद्र से उपलब्ध न कराई जाएं। जब फार्मासिस्ट ने डॉक्टर से इस निर्देश का कारण पूछा तो वह कथित तौर पर बिना कोई स्पष्ट जवाब दिए वहां से चले गए।
बताया जा रहा है कि संबंधित डॉक्टर करीब तीन दिन पहले भी जनऔषधि केंद्र पहुंचे थे। उस दौरान भी उन्होंने मरीजों को केंद्र से दवा नहीं देने की बात कही थी। फार्मासिस्ट ने डॉक्टर के निर्देश पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि प्राचार्य डॉ. गीता जैन की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई डॉक्टर जनऔषधि केंद्र की दवा लेने से मरीजों को रोकता है तो इसकी तत्काल शिकायत की जाए।
इसके बाद शुक्रवार को कुछ डॉक्टरों की ओर से एक पीजी डॉक्टर को जनऔषधि केंद्र भेजे जाने की बात सामने आई। आरोप है कि पीजी डॉक्टर ने भी मरीजों को जनऔषधि केंद्र से दवा न देने के लिए कहा। इस घटनाक्रम के बाद अस्पताल में डॉक्टरों की ओर से लिखी जा रही दवाओं और जनऔषधि केंद्र पर उपलब्ध सस्ती दवाओं को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
46 रुपये की दवा बाहर 200 से 250 रुपये तक मिलने का दावा
मामले में जनऔषधि केंद्र पर उपलब्ध दवाओं की कीमत को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, एक सामान्य सॉल्ट की दवा जनऔषधि केंद्र पर करीब 46 रुपये में उपलब्ध बताई जा रही है, जबकि बाहर मेडिकल स्टोर पर इसी दवा की कीमत करीब 200 से 250 रुपये तक बताई गई है।
ऐसे में यदि मरीजों को जनऔषधि केंद्र से सस्ती दवाएं उपलब्ध हो सकती हैं, तो उन्हें वहां से दवा लेने से रोकने के कथित निर्देशों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, संबंधित डॉक्टर की ओर से इस मामले में क्या कारण बताया गया, यह अस्पताल प्रशासन की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अस्पताल प्रशासन ने शुरू की जांच
दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट ने मामले को संज्ञान में लेने की बात कही है। उन्होंने कहा कि यदि कोई डॉक्टर मरीजों को जनऔषधि केंद्र की दवा लेने से रोक रहा है तो यह बिल्कुल गलत है। मामले की जांच कराई जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि डॉक्टरों को बाहर की दवाएं नहीं लिखने के निर्देश दिए गए हैं। अब अस्पताल प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित डॉक्टर ने वास्तव में मरीजों को जनऔषधि केंद्र से दवा लेने से रोकने के निर्देश दिए थे या नहीं।
फिलहाल, दून अस्पताल का यह मामला सरकारी अस्पतालों में मरीजों को कम कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था, जनऔषधि केंद्र की भूमिका और डॉक्टरों द्वारा लिखी जाने वाली दवाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।











