बाजपुर/देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए फर्जी जाति और स्थायी निवास प्रमाणपत्र तैयार कराने के मामले में पुलिस और एसआईटी की कार्रवाई जारी है। ऊधम सिंह नगर की बाजपुर तहसील में जांच के दौरान फर्जी प्रमाणपत्रों के दो मामलों में नौ लोगों के खिलाफ दस्तावेजों की कूटरचना, धोखाधड़ी और झूठे बयान देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इनमें से पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों पर कथित तौर पर पैसे के दम पर प्रवेश दिलाने वाले गिरोह के एक अन्य सदस्य को एसआईटी ने गिरफ्तार किया है।
बाजपुर तहसील क्षेत्र में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्रों के प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान तीन छात्रों और एक छात्रा के दस्तावेज फर्जी पाए गए। जांच में सामने आया कि चित्रा को बाजपुर के ग्राम रैंटा का निवासी दर्शाते हुए अनुसूचित जाति और स्थायी निवास प्रमाणपत्र तैयार कराया गया था। इसी तरह कुमारी दीक्षा के नाम से भी इसी तर्ज पर प्रमाणपत्र बनवाए गए।
जांच में अनुराग भोजवाल का मामला भी सामने आया। उसे ग्राम मुंडिया कला का निवासी दर्शाते हुए 3 जुलाई को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) जाति प्रमाणपत्र और 6 जुलाई को स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी किया गया था। इसके अलावा कुमारी रिया सिंह के नाम से भी ग्राम रैंटा का निवासी दर्शाकर स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाया गया था।
जांच के बाद इन चारों अभ्यर्थियों के फर्जी दस्तावेज निरस्त कर दिए गए हैं।
मामले में गिरफ्तार आरोपितों में नगर पंचायत बरखेड़ा, पीलीभीत (उत्तर प्रदेश) के चेयरमैन श्याम बिहारी भोजवाल, बरेली निवासी शिवम माथुर, ऊधम सिंह नगर निवासी ऊधम सिंह, मोहम्मद आलम, अर्चना और रोहित के नाम सामने आए हैं। खबर के अनुसार, अनुराग भोजवाल के पिता श्याम बिहारी भोजवाल ने पूछताछ में बताया कि बेटे को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए प्रमाणपत्र बनवाने के उद्देश्य से उन्होंने बरेली निवासी हरपाल को 50 हजार रुपये दिए थे।
बताया गया है कि श्याम बिहारी भोजवाल ने नगर पंचायत बरखेड़ा के चेयरमैन पद का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा था। आचार संहिता के दौरान शराब बांटने के आरोप में उन्हें जेल भी भेजा गया था। चुनाव जीतने के बाद वह भाजपा में शामिल हो गए थे।
एसआईटी ने मेडिकल कॉलेज दाखिला गिरोह के एक और सदस्य को पकड़ा
देहरादून में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की एमबीबीएस सीटों पर पैसे के दम पर प्रवेश दिलाने वाले कथित गिरोह के खिलाफ एसआईटी की कार्रवाई भी जारी है। एसआईटी ने गिरोह के एक और सदस्य धीरज श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया है। वह मूल रूप से मध्य प्रदेश के भोपाल का निवासी बताया गया है।
एसआईटी के अनुसार, धीरज श्रीवास्तव पूर्व में गिरफ्तार किए गए आरोपित रूपेश पंडित का साथी है। मामले में जांच और गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है।












