देहरादून। गदरपुर से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अरविंद पांडे भूमि विवाद के एक मामले को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। शुक्रवार को उन्होंने पुलिस मुख्यालय देहरादून पहुंचकर उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेठ से मुलाकात की। इस दौरान विधायक अरविंद पांडे ने अपने परिजनों पर लगे जमीन कब्जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोनों पक्षों का नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की बात कही।
जांच से भागने नहीं, सच सामने लाने आए हैं : अरविंद पांडे
डीजीपी से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में अरविंद पांडे ने स्पष्ट किया कि वे इस मामले में किसी तरह का दबाव बनाने या मुकदमा खत्म कराने नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला सच है या झूठ, इसका फैसला जांच से होना चाहिए।
अरविंद पांडे ने कहा कि यदि उनके परिवार का कोई सदस्य दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक, मुकदमे के हिसाब से वे खुद को ‘भू-माफिया’ मानने के लिए भी तैयार हैं।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि 20 जनवरी को बाजपुर पुलिस ने जमीन हड़पने के आरोप में गदरपुर विधायक अरविंद पांडे के भाई देवानंद पांडे समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। यह शिकायत गांव बहादुरगंज निवासी संजय बंसल द्वारा दी गई थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी मुंडिया पिस्तौर स्थित जमीन को फर्जी दस्तावेज और किरायानामे के जरिए हड़पने की कोशिश की गई। साथ ही उन्हें धमकी भी दी गई।
अवैध निर्माण को लेकर पहले भी जारी हो चुका है नोटिस
मामले में प्राधिकरण की ओर से 21 अगस्त 2025 को संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में उक्त भूमि पर किए गए निर्माण को अवैध बताते हुए उसे ध्वस्त करने के निर्देश दिए गए थे।
शिकायतकर्ता संजय बंसल का आरोप है कि मौके पर विधायक के भाई और अन्य लोगों ने उन्हें धमकाया और दस्तावेज फेंक दिए।
साजिश का आरोप, भाजपा की अंदरूनी राजनीति पर भी चर्चा
विधायक अरविंद पांडे ने इस पूरे मामले को उन्हें ‘भू-माफिया’ साबित करने की सोची-समझी साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि वे जांच से भागने वाले नहीं हैं और चाहते हैं कि दूध का दूध और पानी का पानी हो।
राजनीतिक गलियारों में इस विवाद को भाजपा की अंदरूनी राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पूर्व में शिक्षा और खेल मंत्री रहे अरविंद पांडे धामी सरकार की दूसरी पारी में लगातार हाशिए पर नजर आए हैं।
केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा मामला
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उत्तराखंड दौरे के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं का अरविंद पांडे के समर्थन में खड़ा होना भी चर्चा का विषय रहा। यह संकेत भी मिले कि मामला केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंच चुका है, हालांकि बाद में कुछ नेताओं की दूरी ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दी।










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