हरिद्वार: उत्तराखंड में बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए ऊर्जा निगम और विजिलेंस विभाग की संयुक्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में मंगलवार सुबह देहरादून से पहुंची विजिलेंस टीम ने हरिद्वार जिले के मंगलौर और झबरेड़ा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की। अचानक हुई इस कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। ऊर्जा निगम के अनुसार अभियान के दौरान अब तक 60 से अधिक बिजली चोरी के मामले सामने आए हैं।
देहरादून विजिलेंस की टीम ने सुबह मंगलौर क्षेत्र के हरचंदपुर, निजामपुर और टांडा भनेड़ा गांवों में पहुंचकर घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच शुरू की। टीम ने बिजली मीटर, कनेक्शन और बिजली आपूर्ति से जुड़े अन्य बिंदुओं की जांच की। अचानक शुरू हुए अभियान के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में काफी हलचल देखने को मिली।
टांडा भनेड़ा में विजिलेंस टीम का विरोध
हरचंदपुर के बाद जब विजिलेंस टीम टांडा भनेड़ा गांव पहुंची तो उसे भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) से जुड़े किसानों और स्थानीय ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों और किसानों ने छापेमारी के विरोध में नारेबाजी की। इस दौरान महिलाओं ने भी कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई।
मौके पर विरोध बढ़ने और स्थिति तनावपूर्ण होने के बाद विजिलेंस टीम ने वहां से वापस लौटना उचित समझा। इसके चलते टांडा भनेड़ा में कार्रवाई को आगे बढ़ाने में टीम को परेशानी का सामना करना पड़ा।
कोटवाल आलमपुर में कार्रवाई जारी
वहीं, झबरेड़ा क्षेत्र के कोटवाल आलमपुर गांव में विजिलेंस और ऊर्जा निगम की कार्रवाई जारी रही। टीम ने गांव में घर-घर जाकर बिजली कनेक्शनों और मीटरों की जांच की। अधिकारियों ने कथित तौर पर अवैध कनेक्शन, कटिया और बिजली आपूर्ति से जुड़े अन्य मामलों की भी पड़ताल की।
समाचार लिखे जाने तक कोटवाल आलमपुर में टीम की जांच जारी थी।
60 से अधिक बिजली चोरी के मामले सामने आए
ऊर्जा निगम के अधिकारियों के मुताबिक, मंगलौर और झबरेड़ा क्षेत्र में चलाए गए इस अभियान में अब तक 60 से अधिक लोगों के खिलाफ बिजली चोरी के मामले पकड़े गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बिजली चोरी के मामलों में नियमों के तहत जुर्माना लगाने के साथ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। हालांकि अंतिम कार्रवाई जांच और संबंधित प्रकरणों के तथ्यों के आधार पर होगी।
विजिलेंस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बिजली चोरी के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। साथ ही सरकारी कार्रवाई में बाधा डालने या टीम के काम में व्यवधान उत्पन्न करने के मामलों में भी नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
बिजली चोरी से जहां ऊर्जा निगम को राजस्व का नुकसान होता है, वहीं अवैध कनेक्शन और कटिया से जुड़े मामलों में विद्युत सुरक्षा को लेकर भी गंभीर जोखिम बना रहता है। ऐसे में आने वाले दिनों में भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इस तरह की कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।












