नैनीताल/देहरादून। बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर आंदोलन कर रहीं सामाजिक कार्यकर्ता और इन्फ्लूएंसर ज्योति अधिकारी को न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। हल्द्वानी की ACJ कोर्ट सेकेंड ने ज्योति अधिकारी की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
ज्योति अधिकारी गुरुवार से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद थीं। उनके खिलाफ उत्तराखंड की महिलाओं और लोक देवताओं के अपमान के आरोप लगाए गए थे। इसके साथ ही उन पर सार्वजनिक रूप से दराती लहराने का भी आरोप दर्ज किया गया था।
शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल होने का दावा
जमानत सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि ज्योति अधिकारी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के उद्देश्य से शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल थीं। उनका किसी भी प्रकार से कानून-व्यवस्था भंग करने या सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का इरादा नहीं था।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान परिस्थितियां अचानक बदलीं, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई।
कोर्ट ने सभी तथ्यों पर किया विचार
अदालत ने मामले से जुड़े सभी तथ्यों, परिस्थितियों और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद यह निर्णय लिया कि जमानत दिए जाने योग्य आधार मौजूद हैं। इसके बाद कोर्ट ने ज्योति अधिकारी को सशर्त जमानत प्रदान की।
समर्थकों में राहत का माहौल
जमानत मिलने की खबर के बाद ज्योति अधिकारी के समर्थकों और आंदोलनकारियों में राहत और संतोष का माहौल देखा गया। समर्थकों का कहना है कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की लड़ाई आगे भी कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगी।
प्रशासन का पक्ष
वहीं प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। मामले में आगे की सभी कार्रवाइयां न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की जाएंगी।
यह मामला अभी भी चर्चा में बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है।










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