हल्द्वानी।
उत्तराखंड की चर्चित ब्लॉगर ज्योति अधिकारी को हल्द्वानी कोर्ट से एक मामले में ज़मानत मिल गई है, लेकिन इसके बावजूद उनकी रिहाई नहीं हो सकी। कारण यह है कि उनके खिलाफ राज्य के अलग-अलग जनपदों में एक साथ कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें अभी कानूनी प्रक्रिया लंबित है।
करीब छह दिन बाद ज्योति अधिकारी को हल्द्वानी न्यायालय में पेश किया गया, जहां अदालत ने संबंधित मामले में उन्हें ज़मानत प्रदान कर दी। हालांकि, अन्य जिलों में दर्ज मामलों के चलते जेल प्रशासन उन्हें रिहा नहीं कर सका।
अन्य जिलों में भी पेशी की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, अब ज्योति अधिकारी को ऊधमसिंह नगर जनपद के खटीमा में दर्ज मुकदमे में भी पेश किया जा सकता है। इसके अलावा अल्मोड़ा और काशीपुर में भी उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज होने की पुष्टि हुई है। इन सभी मामलों में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उनकी रिहाई संभव हो पाएगी।
धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप
ज्योति अधिकारी पर कुमाऊँ क्षेत्र के देवी-देवताओं के अपमान और धार्मिक भावनाएं भड़काने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों को लेकर विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने विरोध दर्ज कराया था, जिसके बाद अलग-अलग थानों में मुकदमे दर्ज किए गए।
विवादों से रहा है पुराना नाता
ज्योति अधिकारी इससे पहले भी कई विवादों में घिर चुकी हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े एक प्रदर्शन के दौरान दराती लेकर पहुंचने का मामला हो या फिर देहरादून में हुए प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर लगाए गए तीखे आरोप—इन घटनाओं ने उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा है।
कानूनी दांव-पेच में उलझी स्थिति
लगातार दर्ज हो रहे मामलों, अलग-अलग जिलों में पेशियों और न्यायिक प्रक्रिया के चलते ज्योति अधिकारी फिलहाल गंभीर कानूनी उलझनों में फंसी नजर आ रही हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक उनका मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि उन्हें अन्य मामलों में कब राहत मिलती है और वे कब जेल से बाहर आ पाती हैं।










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